सर्दियों में किस प्रकार से करें सुरक्षा अपने नन्हें मुन्नों की

सर्दियों में किस प्रकार से करें सुरक्षा अपने नन्हें मुन्नों की

वैसे तो सभी मौसम अपनी-अपनी जगह सबके पसंदीदा होते हैं लेकिन सर्दियों का मौसम ज्यादातर सबको ही पसंद आता है लेकिन हो ना हो यह मौसम छोटे बच्चों के लिए थोड़ा कठिनाई भरा समय जरूर ले आता है व उससे भी ज्यादा चिंता का विषय हम माताओं के लिए बन जाता है कि किस प्रकार आने वाली सर्दी से अपने बच्चों की सुरक्षा की जाए ताकि वह कम से कम बीमार पड़े।किस प्रकार उनकी ठंड से रक्षा करे ताकि‌ उनको खांसी व जुकाम के भयंकर जकड़न वाले प्रकोप से बचाया जा सके।

वैसे तो हर माँ समझदार होती है‌ व जानती है कि उसके बच्चे के लिए क्या सही है व क्या गलत. वह सही प्रकार से सही समय पर अपने बच्चों को जुराबे,गर्म बनियान,दस्ताने, गर्म टोपी इत्यादि पहनाकर सर्दी से उनकी रक्षा करती है परंतु काफी बार इतनी सुरक्षा देने के बावजूद भी हमारे बच्चों को ठंड लग ही जाती है इसलिए बाहरी सुरक्षा देने के साथ साथ हमें कुछ अन्य बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए जो कि इस प्रकार हैं:-

• छोटे बच्चे को सर्दी लगने पर हमारी प्राथमिकता उसे डाक्टर के पास ले जाकर दवाई दिलवाने की होती है जोकि उचित भी है लेकिन ज्यादातर Antibiotics व Anti allergic के इस्तेमाल से छाती में ठंड लगने से बना रेशा वही जम जाता है जोकि कुछ समय बाद दिक्कत का विषय बन जाता है जिससे बच्चों मे running ribs (chest fever) होने का खतरा हो जाता है इससे बचाव के लिए कभी भी बच्चों को ज्यादा मात्रा में इस प्रकार के दवाइयों की आदत न डाले। व nebulizer के इस्तेमाल से भी ‌परहेज करे क्योंकि इसके इस्तेमाल से यह बच्चों में nausea,heartburn,stomach pain,headache जैसी समस्याओं को‌ सामने ला सकता है।

• बच्चों को गीलेपन से बचाए रखना बेहद आवश्यक होता है छोटे बच्चे दिन व रात में बार बार मूत्र करने से अपने कपड़े गीले कर लेते हैं‌ जिन्हें बार बार बदलना दिक्कत देता है इस समस्या से बचने के लिए बहुत ठंड पड़ने पर बच्चों को डाइपर पहना कर रखे ताकि वह अपने कपड़े बार बार गीले न कर पाये लेकिन एक बात का अवश्य ध्यान रखे कि समय समय पर डाइपर को चेक करते रहे व बच्चे कि स्किन को हवा लगवाते रहे ताकि बच्चा रेशेज से बचा रहे ।

• बच्चों की छाती को ठंड से बचाने के लिए रूई की कुछ परत लेकर उसकी छाती पर अवश्य रखे ताकि छाती में गरमाइश बनी रहे व छाती पर ठंडी हवा न लगे।

• ठंड लगने पर सरसों के तेल में दौ लहसुन की कलियाँ डालकर जला दे व ठंडा होने पर इस तेल से बच्चे की छाती व पैरों के तले पर दिन में दो या तीन बार मालिश करे ऎसा करने से उसे काफी राहत मिलेगी।

• शहद ठंड से बचाव करने का एक काफी उपयोगी साधन हैं एक चम्मच शहद में थोड़ा सा अदरक घिसकर उसका रस निकाल कर बच्चों को चटाने से काफी राहत मिलती है। व बच्चों के लिए अजवाइन का काढ़ा भी बेहद लाभदायक रहता है। इसके अलावा तुलसी, अदरक व मोटी इलायची की चाय भी सर्दी भगाने का अच्छा साधन है।

• अपने बच्चों में बचपन से ही कुछ ड्राइ फ्रूटस‌ जैसे कि बादाम,अखरोट,खुबानी,मुगँफली व खजूर खाने की आदत डाले..गर्म दूध के साथ यह कुछ ड्राइ फ्रूटस‌ खिलाने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही हैं साथ ही साथ ठंड से भी बचाव रहता है,इसके अलावा हम 3 साल से ऊपर के बच्चों को डाबर का आयुर्वेदिक च्यवनप्राश भी दे सकते हैं अलग अलग फ्लेवर होने से बच्चे इसको बड़े ‌शौक से खाना पसंद करते हैं। लेकिन एक बात का ध्यान अवश्य रखे कि सर्दी जुकाम‌ होने पर बच्चों को‌ दूध,चावल व केले जैसे खाद्य पदार्थों से अवश्य परहेज करवाए।

• बच्चों के हाथों को‌ अवश्य समय समय साफ करते रहे व अपने हाथों की‌‌ सफाई का भी ध्यान रखे क्योकि गंदे हाथों से खाना खाने व खिलाने से सीधा infection शरीर में पहुँच जाता है व छोटे बच्चों का Immunity system कमजोर होता है जिस वजह से वह जल्दी बीमार पड़ जाते हैं।

• बच्चों की नैपीज को अवश्य ही Dettol Antiseptic liquid से धोना न भूले क्योकि जिस प्रकार गर्मी में पसीने से Infection होने का डर रहता है उसी प्रकार सर्दियों मे भी कपड़ो पर पूर्ण रूप से धूप न लग पाने के कारण infection होने का खतरा ज्यादा हो रहता है तो इस बात का अवश्य ध्यान रखे।

• सबसे महत्वपूर्ण बात छ: माह व उससे छोटे नवजात शिशु के लिए किसी भी रोग से लड़ने के लिए दवाई से ज्यादा महत्वपूर्ण माँ का दूध होता है इसलिए शिशु को दूध पिलाने वाले समय में खुद के खान-पान व साफ सफाई का अवश्य ध्यान रखे ताकि आपका शिशु जल्दी स्वस्थ हो सके।

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