शुरुआत एक नवीन पहल की (भाग-3)

शुरुआत एक नवीन पहल की (भाग-3)

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क्रमश: ……. ******* भाग-2 ******* ….. से

फिर दूसरे दिन राजी और वत्सला ऑफिस पहूंचतीं हैं! हमेशा की तरह,तो पता चलता है कि अनुपमा आज आई नहीं है और वे कारण जानने के लिए अनुपमा को फोन लगाती हैं, तो उसका भाई विजय उठाता है और बताता है कि एक तो कंवल की तबियत वैसे ही ठीक नहीं थी, इसलिए दीदी का मन ऑफिस जाने का नहीं हो रहा था! न जाने दीदी की सासु मॉं ने ऐसा क्‍या कह दिया कि दीदी जबसे रोए जा रही हैं, बस इसीलिए वे आज ऑफीस नहीं आ पाईं और मायके आ गईं। इतना सुनते ही राजी और वत्‍सला शाम को ऑफिस समयाविधि के पश्‍चात अनुपमा से मिलने जाने की योजना बनाती हैं! वैसे वे बहुत खास सखियां तो नहीं थी, पर सामाजिक तौर पर इंसानियत के नाते भी तो कोई फर्ज बनता है कि नहीं? नहीं तो वर्तमान में ये आलम है साथियों कि कोई किसी के हालचाल पूछने में भी कमी महसूस करता है, न जाने क्‍यों?

इतनी सब परेशानियों को झेलने के पश्‍चात भी पता नहीं अनुपमा में कुछ तो ऐसी बात थी कि वो अपने अपनत्‍व की भावना से सबका दिल लुभा लेती! चाहे घर हो या बाहर। सिर्फ उसके सास-ससुर ही उसे उनके बेटे अशोक की मृत्‍यु के पश्‍चात सहायता करने के बजाए सामाजिक कुरितियों तले दबाने की कोशिश हरदम करते रहते हैं।

फिर शाम को राजी और वत्‍सला अनुपमा के मायके जाती हैं! उससे मिलने। फिर उसकी मॉं बताती है कि जब से ससुराल से आई है अनुपमा, ऐसे ही गुमसुम सी बैठी है! कंवल की तबियत नासाज है, सो अलग… हम आखिर करें तो क्‍या कुछ भी समझ में नहीं आ रहा। एक तो जब से अनुपमा और विजय के बापुजी नहीं रहें, तब से अकेले ही संसार चलाना पड़ रहा है। पहले हम नागपुर के पास परसौनी गांव में रहते थे और अनुपमा व इसके बापुजी सामाजिक सेवा करने के साथ ही साथ बुजुर्गो को शिक्षित भी करते थे। मैं और विजय खेतीबाड़ी संभालते! पर अचानक ही इनके बापुजी हमें अकेला छोड़ स्‍वर्ग सिधार गए और सब खेतीबाड़ी बेचकर हम लोग भोपाल शहर आकर बस गए, क्‍योंकि दामाद अशोक जी ने अनुपमा को पसंद जाे कर लिया था गांव में ही। वे फौज में नौकरी करते थे और नागपुर में कर्नल के पद हेतु परीक्षा देने आए थे दोस्‍त रमेश के साथ! जो हमारे ही गांव में रहता था। अभी तो पता नहीं बिटिया से ऐसा क्या कह दिया समधन जी ने! हो सकता है, आप लोगों को बता दे।

जी हाँ साथियों, कहानी में आगे क्या हुआ कि उत्सुकता बनाए हुए यदि इच्छुक हों तो पढ़ते रहिए लगातार….. जल्दी भाग-4 भी प्रकाशित अवश्य होगा।

……. ।।।।।।।। क्रमश: भाग-4 की ओर ।।।।।।।। ………

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