शिशु और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

शिशु और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

जब से मेरी बेटी हुई है मैंने उसके आस पास हमेशा साफ सफाई का ख्याल रखा है। एक सैनिटाइजर की बॉटल हमेशा मेरे बैग, बिस्तर, और टेबल के ऊपर मिल जाएगी। मैंने अक्सर देखा जब भी कोई उससे  मिलने आता, तो उनमें से कुछ लोग तो हाथ धोते या सैनिटाइजर का प्रयोग करते, लेकिन कुछ बिल्कुल भी नहीं करते। मुझे समझ नहीं आता कि क्यों बार बार एक ही चीज को दोहराना पड़ता है कि हाथ धो लो, सैनिटाइजर लगा लो। घर आने जाने वालों का भी यही हाल है। नीचे पार्क में घूमाने जाओ वहाँ  भी वही हाल देखने को मिलता है। बच्चे को प्यार जताने के लिए गंदे हाथ से छूना ज़रूरी नहीं है। अपने घर में साफ सफाई रखने से हमें सर्दी, जुखाम और मौसमी बुखार नहीं होता है। उसका सिर्फ यही कारण है।  बेटी को जब वायरल हुआ तो, मैं सकते में आ गई। किसी को टोक दो तो वह बुरा मान जाते हैं कि, “अरे हमने भी बच्चे पाले है। हमारे भी बच्चे है। ” यहाँ मै बच्चो के स्वास्थ और स्वक्षता से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालना चाहूंगी जो कि इस प्रकार है-

1. नवजात, शिशु या बच्चो को जहाँ तक हो सके हाथ ना लगाएं। मैं फिर से दोहरा रही हूं। कृपया हाथ ना लगाएं।

2. अगर आप बीमार है, सर्दी, जुखाम है तो दूर रहें। बीमार है तो किसी बच्चे वाले के घर में ना जाएं।

3. हाथ ना धो सके तो सैनिटाइजर का प्रयोग करें। हो सके तो अपने बैग में भी एक छोटी बॉटल रखे। यह 20-30 रूपए की मिल जाती है।

4. खांसी, छींक आने पर मुंह पर रुमाल रखें। रुमाल ना हो तो हाथ रखें। ज़रूरी बात की रुमाल भी साथ रखें।

5. जिस हाथ का प्रयोग खांसने या छींकने के बाद किया हो उससे हाथ ना मिलाएं या बच्चे को ना छुएं।

6. सबसे बेहतर घर में रहें और बीमारी ना फैलाएं।

7. बाहर से घर वापस आने पर हमेशा हाथ धोएं। परिवार को सुरक्षित रखने का यह सबसे अच्छा तरीका है।

8. बाहर से घर आने पर कपड़े बदले। गंदे कपड़े पहन कर किसी के बिस्तर पर ना बैठे।

9. हाथ धोने का मतलब साबुन से हाथ धोना है। पानी से हाथ सिर्फ गीले होते है साफ नहीं होते। बीमारी फैलाने वाले किटाणु साबुन से मरते है, पानी से नहीं। यह बात पढ़े लिखे लोगो भी समझाना पड़ता है

10. टॉयलेट सीट से भी ज़्यादा किटाणु जिस चीज में होते है वो चीज इस समय आपके हाथ में है। जी हाँ … आपका मोबाइल फोन। मोबाइल फोन, टीवी का रिमोट, चाभी यह सारी चीज़े बच्चे को ना दें। बच्चे इसे मुँह में डालते है और बीमार पड़ते है।

11. बच्चा अगर स्कूल जाता हो तो घर आने पर सबसे पहले हाथ, मुँह धुलाएं और कपड़े बदलवाए। फिर कोई दूसरा काम करें।

12. जूते पहन कर बिस्तर पर ना खुद बैठे ना बच्चे को बैठने दें।

13. नंगे पैर घर में घूम कर बिस्तर पर न बैठे। कुछ लोगो की यह बहुत खराब आदत होती है। बिना चप्पल पहने घर में घूमते है और बिस्तर गंदा करते है। अपने घर में भी और दूसरे के घर में भी।

14. बाथरूम जाने पर भी चप्पल का इस्तेमाल करें।

15. बॉटल में मुंह लगा कर न पिएं। गिलास का इस्तेमाल करें।

16. अपने बच्चे के बीमारी होने पर, हो सके तो उसे घर पर ही रखे।

17. सब्जी, तरकारी, शॉपिंग करते हुए बच्चे को हाथ ना लगाएं।

18. बच्चे के समान और खाने पीने की चीजों को गंदे हाथ से ना छुएं।

19. कभी भी किसी और के बच्चे को अपने मन से कुछ भी खाने को ना दें। हो सकता है कि उस खाने से बच्चे को एलर्जी हो।

20. नीचे गिर हुआ सामान उठा कर बच्चे को ना दें। बच्चे सीधा उसको मुंह में डालते है।

यह सब बुनियादी स्वच्छता(Basic Hygeine) के दायरे में आता है। खुद भी पालन करें  और अपने बच्चो को भी सिखाएं। बच्चे जो देखते है, वही सीखते है। आप खुद हाथ नहीं धोएंगे और बच्चे से उम्मीद करेंगे तो उपरोक्त बातें लागू नहीं हो सकती। कुछ लोगों को कई बार यह भी कहते सुना है कि “अरे ज़्यादा सफाई मत रखो, मिट्टी में खेलने दो। स्ट्रॉन्ग बनेंगे। हम भी बचपन में खेलते थे। बच्चे तो बीमार होते रहते है।”  ठीक है, सब खेलते थे। ज़रूरी नहीं जो हमने किया वो हमारे बच्चे भी करें। पहले के ज़माने और आज के जमाने में बहुत फर्क आ गया है और नई बीमारियां भी । अच्छी आदत अपनाने में कोई बुराई नहीं है। लोगो की लापरवाही के चलते एक छोटे से बच्चे को बीमार हो कर कितना कष्ट उठना पड़ता है यह बात क्यों नहीं समझते लोग। उम्मीद है आप सब भी मेरी बातों से सहमत होंगे।

एक मां की कलम से।

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