मेरे बच्चे का खिलौना, मेरा मोबाइल

मेरे बच्चे का खिलौना, मेरा मोबाइल

चिंटू 3 साल का हो गया है । घर में ढेर सारे खिलोने होते हुए भी ,वह अपने मम्मी के फ़ोन या पापा के लैपटॉप या फिर T.V  देखता रहता है ।बस दिनभर राहीम्स  , वेडिओस और कार्टून देखता है ।स्कूल भी जाता है । पर बाकि पूरा दिन यही काम है उसका ।ये बंद तभी होता है जब वह सोता है ।आज कल जैसे जैसे हम टेक्नोलॉजी में प्रगति करते जा रहे हैं , वैसे वैसे हम उसका अंधाधुन्द इस्तेमाल कर रहे हैं । अब कल ही मैं रूटीन चेकउप के लिए डॉक्टर के पास गई हुई थी, वह पर कुछ माता पिता अपने बच्चो के साथ आये थे, बच्चो की उम्र २-५ साल तक थी , सब बच्चे फ़ोन पर गाने या वेडिओस देख रहे थे । इसका चलन आम हो गया है ।

राहीम्स दिखाना,सीखना बुरी बात नहीं है, बुरा है इसके अति होना । आजकल कुछ माता पिता अपने काम ( घर / ऑफिस) की व्यस्तता के कारण बच्चो को फ़ोन / लैपटॉप इत्यादि में व्यस्त कर देते हैं । इन सबका दुषप्रभाव बच्चो पर पड़ता है , जैसे: फ़ोन की ज्यादा लत्त लत लगना, दिमागी एवं शारीरिक विकास में दिक्कतें आना, नज़र कमज़ोर होना, सर दर्द रहना, भूक न लगना, गलत सांगत में पड़ना , इत्यादि..

इसलिए बच्चो को फ़ोन / लैपटॉप देने से पहले कुछ नियम अपने लिए निर्धारित करें

१. समय निर्धारित करें

जी हाँ , आप अपने और बच्चो के लिए समय निर्धारित करें,की आपका बच्चा कब और कितनी देर तक फ़ोन / टीवी/ लैपटॉप ,का उपयोग करेगा। यदि आप वर्किंग हैं तो अपने लिए भी यही तरीका अपनाये , बच्चे अपने बड़ों से ही सीखते हैं!

२. बच्चो को पार्क ले जाये

बच्चो को आधा या इक घंटे के लिए सोसाइटी या घर के पास के पार्क लेकर जाएं, उससे बच्चा थोड़ी देर खेलेगा भी और उसकी थोड़ एक्सरसाइज भी होगी, उससे वो थकेगा भी और रात में जल्दी सोयेगा भी।

३.फ्रैंडसर्कल बनाये

आप अपनी सोसाइटी में कुछ बच्चो के हमउम्र माता पिता से जान पहचान बनाये ,उससे आपको और आपके बच्चे को भी साथी मिल जाएंगे।

४. डिवाइस पर लॉक लगाए

आप अपने फ़ोन, लैपटॉप टी वी पर लॉक लगा सकते है , या फिर हाईड कर सकतें है, प्ले स्टोर/ एप्पल अप्प स्टोर  से भी आप स्मार्ट अप्प लॉक डाउनलोड कर उसमे हाईड कर सकतें हैं। साथ ही आपका बच्चा डिवाइस पे क्या सर्फ करता है , क्या देखता है इस्पे भी ध्यान दें।

माता पिता अपने बच्चे के लिए बुरा नहीं चाहते , बस थोड़ा सा अपने समय की व्यस्तता  से और थोड़ा सा बच्चो के जिद के आगे मज़बूर हो जातें हैं, जरुरत होती ही थोड़ी सी समझदारी की  ।

इस लेख मैं मेरी अपनी राय  है , किसी माता पिता की भावनाओ को ठेस पहुंचना मेरा उद्देश्य नहीं ।

Disclaimer: The views, opinions and positions (including content in any form) expressed within this post are those of the author alone. The accuracy, completeness and validity of any statements made within this article are not guaranteed. We accept no liability for any errors, omissions or representations. The responsibility for intellectual property rights of this content rests with the author and any liability with regards to infringement of intellectual property rights remains with him/her.