मास्क – जीवन का कवच या प्रकृति के लिए नया संकट

कोरोना पैंडेमिक जिस तरह से मानव जीवन के लिए त्रासदी साबित हुई है उसी प्रकार प्रकृति के लिए वरदान साबित हुई है। प्रकृति ने जिस तरह मानव जीवन को चेतावनी दी कि सुधर जाओ खिलवाड़ मत करो उसी प्रकार पल-पल उससे बचाव के लिए सचेत भी किया।

यह समय समस्त प्रकृति के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। हर ओर एक अजब सी शांति और स्वच्छ वातावरण था। मन में इस तरह के प्रश्न आते थे कि क्या हम इस युग में ही हैं। वहीं दूसरी ओर इस कोरोना महामारी ने समस्त जनजीवन को तो अस्त व्यस्त कर दिया। यह लगता था कि जीवन रुक गया हो। क्या हम कभी इससे उबर पाएंगे, क्या सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो पाएगा।

यह महामारी क्षणभर के लिए तो प्रकृति के लिए वरदान साबित हुई क्योंकि प्रदूषण का स्तर बिल्कुल गिर गया। साफ वातावरण में पक्षियों ने भी खुल कर सांस ली पर यह उनके लिए क्षणिक था क्योंकि लॉकडाउन खुलने के बाद कोरोना से बचने वाले नियमों की जिस तरह से अवहेलना कि गई वह किसी से छिपा नहीं है। पढ़ा-लिखा समाज भी इससे अछूता नहीं है। यही कारण है कि हमने संक्रमण के इस अविश्वनीय स्तर को छू लिया।

लेकिन इससे यह संकेत तो हमें प्रकृति ने दे दिया है कि आने वाले समय में हमें और हमारी पीढ़ी को इस तरह की महामारियों के लिए तैयार रहना होगा और अभी से इनसे कैसे बचना है, अपने बच्चों को सिखाना होगा।

अब जैसे बात आती है मास्क की। इसका प्रयोग पहले भी वायरल, प्रदूषण आदि से बचने के लिए होता था पर कोविड समय में इसका प्रयोग जिस तेजी से बढ़ा है उससे हम कोरोना को रोकने में तो सहायक हैं पर जिस प्रकार से यह बढ़ रहा है तो क्या हम किसी नए संकट को तो आमंत्रित नहीं कर रहे हैं, इस पर भी विचार करना अति आवश्यक है। इसलिए अभी से अपने बच्चों को सिखाइए कि यह हमारे लिए किस तरह से उपयोगी है कि हमारे साथ-साथ प्रकृति को भी सुरक्षा प्रदान करे।

आइए सबसे पहले जान लेते हैं कि मास्क मुख्यत: कितने प्रकार के होते हैं और इनका हर जगह पर अपना महत्व है। क्योंकि बहुत से लोगों को मास्क के सही इस्तेमाल और इनके सही रखरखाव के बारे में जानकारी नहीं होती है। आइए जानते हैं, मास्क के बारे में –

ये दो प्रकार के होते हैं:

  • फैब्रिक मास्क
  • सर्जिकल मास्क

फैब्रिक मास्क काॅटन का बना होता है। इसे घर पर कपड़े से बहुत आसानी से बनाया जा सकता है। इसमें कम से कम तीन परतें बनानी चाहिए। इसको अच्छे से धोकर और धूूप दिखाकर इसका प्रयोग कई बार कर सकते हैं। इसका प्रयोग हमें ऐसी जगह पर करना चाहिए जहाँ भीड़भाड़ कम हो।

सर्जिकल मास्क को मेडिकल मास्क भी कहते हैं। यह बस एक बार के इस्तेमाल के लिए होता है, उसके बाद इसको नष्ट कर देना चाहिए। इसका प्रयोग भीड़भाड़ वाली जगह पर करना चाहिए जहाँ पर सामाजिक दूरी का पालन न हो रहा हो।

यह मेडिकल वेस्ट है इसलिए इधर-उधर फेंकने के बजाय हमें इसे मिट्टी में दबा देना चाहिए ताकि यह जानवरों की पहुँच से दूर रह सके क्योंकि उसमें हानिकारक जीवाणु और विषाणु होते हैं।

मास्क का सही प्रयोग

  1. हमारे पास फैब्रिक और सर्जिकल, दोनों तरह के मास्क होना आवश्यक है।
  2. अगर आप पूर्णत: स्वस्थ हैं तब कपड़े के मास्क का ही प्रयोग करें अन्यथा सर्जिकल मास्क का प्रयोग करें।
  3. याद रखें जो मास्क आप इस्तेमाल कर रहे हैं वह कम से कम तीन परतों से बना हो।
  4. मास्क को किसी के साथ भी शेयर न करें।
  5. मास्क को एक सही समय अंतराल पर बदलते रहें।
  6. आपका मास्क ऐसा होना चाहिए जिससे आपके नाक-मुँह सही से ढक जाएं।
  7. मास्क को कभी भी सामने से न उतारें, कान की तरफ से ही उतारें।
  8. अगर मास्क इस्तेमाल करते वक्त गीला हो जाए तब उसे तुरंत बदल देना चाहिए।

मास्क को कैसे साफ करें

  1. अगर आप कपड़े के मास्क का प्रयोग करते हैं तब आप उसे गर्म पानी से साफ करें। उसमें डेटाॅल भी डाल सकते हैं और फिर कम से कम 5 घंटे धूप दिखाइए।
  2. अगर आप डिस्पोसेबल मास्क का प्रयोग करते हैं तब प्रयोग के बाद उसे अच्छे से मिट्टी में दबा दें ताकि वह वातावरण को दूषित न करे।

मुझे लगता है कि यह जानकारी हम सभी के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण है और इस प्लेटफार्म के जरिए आप सभी तक भी आसानी से पहुँचाई जा सकती है। अपने बच्चों को भी ये सब सिखाइए ताकि वह अभी से सीख सके।

इस लेख के बारे में आप भी अपनी राय जरूर बताएं।

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