मायका या ससुराल – आखिर किसे अपना घर मानती है आप

मायका या ससुराल - आखिर किसे अपना घर मानती है आप

अक्सर मैंने कुछ लड़कियों को या ऐसा कहिए कुछ बहुओं को ये कहते हुए सुना है कि उन्हें बस अपना मायका ही अच्छा लगता है ससुराल नहीं। कुछ बहुएं जो भाग्यशाली होती हैं, उन्हें अपने ससुराल में रहना ज्यादा बेहतर लगता हैं। और कुछ बहुएं सौभाग्यशाली होती है जिन्हें ना केवल अपना मायका ही प्यारा लगता है बल्कि ससुराल भी उतना ही प्यारा होता है। मेरा नाम भी उन्हीं सौभायशाली बहु की लिस्ट में आता है।



जी हाँ, मैं भी खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ जिसे अपने मायके जैसा ससुराल मिला है। जितना प्यार और सम्मान मुझे मायके में मिला उतना ही प्यार और सम्मान मुझे अपने ससुराल में मिलता है।



मायके में अगर हर गलती पे प्यार से समझाने वाला पिता है तो ससुराल में पिता के रूप में ससुर हैं। मायके में अगर हर कदम पे साथ देने वाली माँ है तो ससुराल में माँ के रूप में सास है। मायके में अगर प्रोटेक्ट करने के लिए भाई है तो ससुराल में भाई के रूप में देवर है। मायके में अगर प्यार करने वाली बहन है तो ससुराल में बहन के रूप में ननंद है। इसके साथ ही एक और अनमोल तोहफा मिलता है ससुराल में वो भी खुदा के रूप में, जो कि पति है। वो पति, जो हर ख़ुशी हर ग़म में हमेशा साथ देता है।

ये तो रही सौभाग्य की बात। लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि किसी रिश्ते को सँभालने के लिए या यूं कहिए हर रिश्तों को संजोग के रखने के लिए एक समझदारी की भी ज़रूरत होती है। मैं ये नहीं कह रही की समझदारी बस एक को दिखानी चाहिए । जबकि घर में रह रहे हर एक सदस्य को समझना जरूरी है कि हर रिश्ते को निभाने के लिए समझदारी ज़रूरी है या यूं कहिए थोड़ा समझौता ज़रूरी है।




ज़िन्दगी अनमोल है लेकिन ये तभी अनमोल है जब आपके पास अच्छे रिश्ते हों । जो आपसे और आपकी ज़िन्दगी से प्यार करें । इसी प्यार और अपनेपन के कारण ही ज़िन्दगी को अनमोल माना गया है।

ससुराल में अक्सर सास और बहुओं के झगड़े को ही रिश्ते तोड़ने का एक कारण माना जाता है। मैंने बहुत सी बहुओं को कहते हुए सुना है कि उनकी सास से कभी नहीं बनती हमेशा नोकझोंक होती रहती है। अब आप ही बताइए, नोकझोंक किस रिश्ते में नहीं होती। क्या एक पति पत्नी के बीच कभी नोकझोंक नहीं होती। क्या एक माँ और बेटे के बीच में कभी नोकझोंक नहीं होती। क्या एक बाप और बेटी के बीच में कभी नोकझोंक नहीं होती। अगर इन सब नोकझोंक को मीठा बोला गया है तो एक सास और बहू की नोकझोंक को कड़वा क्यों बोला जाता है। ये सिर्फ एक रीत चली आ रही है कि अगर सास – बहू में हल्की सी लड़ाई हुई तो वो बुरा है। लेकिन ऐसा नहीं है।





देखिए, हर रिश्तों को निभाने के लिए छोटी मोटी नोकझोंक भी ज़रूरी है जिससे रिश्ते में प्यार की मिठास और बढ़ती है। कहते है न कि एक दूसरे से ख़ुशी बाँटने से रिश्तो में प्यार बढ़ता है। लेकिन सच तो ये है कि ख़ुशी के साथ ग़म ज्यादा बाँटने से रिश्तों में एक अलग ही मिठास आती है।उस मिठास को हमेशा बरक़रार रखें।

अपने अनमोल रिश्ते को समझिए और प्यार से अपनाइए । फिर देखिए आपके आसपास का माहौल कितना खुशनुमा होगा। जिए और जीने दें । प्यार बांटे।




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