माँ के कान भरती बेटियां जिम्मेदार है, अपने मातापिता की अशांति के लिए ..

माँ के कान भरती बेटियां जिम्मेदार है, अपने मातापिता की अशांति के लिए ..

सुबह के 7 बजे फोन की घण्टी लगातार बजे जा रही थी, गहरी नींद में सोई सुधा का बिस्तर छोड़ने का मन नही हो रहा था पर फोन के घण्टी के शोर ने सुबह की सारी मीठी नींद का मजा किरकिरा कर दिया मन मारकर सुधा ने बिस्तर छोड़ा और फोन उठाया.

अरे माँ कहां थी कितनी देर से फोन कर रही हूँ उठाया क्यों नही पता है मुझे कितनी चिंता हो रही थी कैसे कैसे बुरे ख्याल आ रहे थे मन मे , अरे बेटा मैं ठीक हूँ तू क्यों चिंता करती है इतनी सुबह सुबह फोन बजा देती है ” अरे मां सुबह कहा है 7 बज रहे है चाय पी की नहीं ?  बेटा अभी बहू उठेगी तो बनाएगी आज छुट्टी है ना बच्चों की इसलिए थोड़ी देर हो गयी होगी .
अरे माँ भाभी अभी तक सो रही है शर्म नही आती उसे कम से कम तुम्हे टाइम पर चाय तो देनी चाहिए और भाई को भी देखो कुछ नही कहता उससे पूरा जोरू का गुलाम बन कर रह गया है महारानी इतनी देर तक सोती रहती है ।
अरे बेटा तू क्यों चिंता कर रही है मैं पी लुंगी चाय वैसे तो रोज सुबह चाय जल्दी ही पी लेती हूं आज इतवार है तो सब देर तक सो रहे है कोई बात नही बहु नही उठेगी तो मैं खुद बना लुंगी चाय , इसमें कौन सी बड़ी बात है ।
अरे मां तुम क्यों जाओगी रसोई में भाभी क्या करेगी फिर तुम बस आराम करो कोई जरूरत नहीँ है कोई काम करने की मैं अभी भाई को फोन करती हूं ।
इतना कहकर राशि ने फोन रख दिया ।
थोड़ी देर बाद सुधा की बहू उठ गई निशि बहुत ही ध्यान रखती थी घर मे सभी का पर पता नही क्यों उसकी ननद फोन पर हर छोटी छोटी बात अपनी माँ से पूछती जैसे , आज भाभी ने क्या खाना बनाया ..?, आज क्या नास्ता किया?  आज कपडे धुले की नही ? आज भैया भाभी घर पर है कि घूमने गए है । हर बात उसकी ननद अपनी माँ से फोन पर पता करती । दिन में चार पांच बार अपनी माँ को फोन करती और रात को भी 11 बजे तक पूरे दिन की दिनचर्या पता कर कर ही सोती । अपनी ननद की ये आदत निशि के लिए बहुत दुखदायी थी क्योंकि उसकी सास सुधा घर मे हमेशा खुश रहती उसे अपने बेटे बहु से कोई शिकायत नही थी क्योंकि एक साथ रहते है तो कभी कभी थोड़ा मनमुटाव तो हर घर मे होता है पर ऐसी कोई भी बात नही थी कि सुधा के बेटे बहु उसका ख्याल नही रखते थे । निशि तो अपनी सास को टाइम पर चाय नाश्ता और गर्म खाना देती थी ।
अपनी सास के कपड़े भी टाइम से धोती पर फिर भी पता नही क्यों उसकी ननद राशि अपनी माँ को रोज फोन कर कर सारी बातें पता करती । अपनी बेटी का फोन आने पर सुधा को भी लगता कि उसके बेटे बहु उसका ध्यान नहीं रखते वो घर मे अकेली पड़ी रहती है फोन सुनकर सुधा का भी मूड खराब हो जाता और उसे भी अपने बेटे बहु की सिर्फ कमियां ही दिखती सारे घर मे टेंशन का माहौल हो जाता ।
दोस्तों ये सिर्फ एक सुधा के घर की कहानी नही है ज्यादातर घरों की यही कहानी है बेटियां  अपने मायके में कुछ ज्यादा ही दखलंदाजी करती है चाहे खुद अपनी सास के साथ रहना पसंद ना करें अपनी सास के आने पर पति से लड़ाई करें पर अपने मायके में अपनी माँ के कान जरूर भरती है। अपने भैया भाभी को बात बात पर ताने देती है कि तुम माँ का ख्याल नही रखते या तुम बहुत ही बदल गए हो माँ घर मे अकेली पड़ी रहती है उसे कोई पूछता नही है …
ऐसी बेटिया..
ही अपने मातापिता के लिए उनकी जिंदगी की अशांति के लिए जिम्मेदार होती है ।
अन्तिमा सिंह
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