मम्मा आप घर कब आओगे !

मम्मा आप घर कब आओगे !

बात मेरी दूसरी डिलिवरी की है, मैं अपने पीहर में ही थी – आठवां महीना चल रहा था । मेरा ब्लड प्रेशर प्रेग्नेंसी में हाई ही रहता है, उस दिन मेरे पति भी मिलने आए हुए थे।दोपहर को अचानक मेरा जी घबराने लगा, ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ गया। हम तुरंत डॉक्टर के पास गए तो पता चला कि बच्चे की धड़कन कम हो गई है और सोनोग्राफी में बच्चे के गले में नाल के 3 लूप फंसे दिखाई दिए।

“अभी ऑपरेशन करना पड़ेगा तैयारी शुरू करो ” डॉक्टर ने कहा, हम सभी डर गए।मुझे एडमिट कर दिया गया, यह सब इतना जल्दी हुआ कि हमें – मेरी 4 साल की बेटी का ख्याल ही नहीं आया। मैं तो ठीक से मिलकर उसे कुछ समझा कर भी नहीं आई, उसे भी ज्यादा तो कुछ समझ नहीं आया पर वो इतना जान गई कि मम्मा की तबीयत खराब हो गई हैं। वैसे भी पिछले कुछ महीनों से मुझे रूटीन चेकअप करवाते हुए देखा था तो उसे लगा कि” मम्मा तो हमेशा जाती रहती हैं डॉक्टर के पास, शाम तक मम्मा आ जाएगी।

मेरी नादान परी नहीं जानती की इस बार मम्मा इतनी जल्दी नहीं आने वाली। मेरे पति हॉस्पिटल में ही थे और पापा-मम्मी घर पर उसकी देखभाल कर रहे थे।जैसे-जैसे अंधेरा छा रहा था, उसका मन और भी बेचैन हो रहा था, आखिर वो रो पड़ी “मम्मा चाहिए”।

मेरे पापा ने विडियो कॉलिग करवाई, जैसे ही उसने मुझे देखा झटपट अपने छोटे-छोटे हाथों से अपने आंसू पोंछ लिए और खिलखिला उठी,पर मैं अपने आंसू नहीं रोक पाई।उसने मुझ से एक ही सवाल किया “मम्मा, आप घर कब आओगी”। मैंने कहा ” बहुत जल्दी, आप नानी को तंग मत करना”।उसने कहा” ओके मम्मा” जैसे वो हमेशा कहती है।

ऑपरेशन हुआ एक और बिटिया मेरी गोद में आ गई, मेरे जिगर का टुकड़ा – लेकिन मन में इंतज़ार तो घर जा कर दूसरे टुकड़े को गले लगाने का था। डॉक्टर ने मेरी परेशानी समझ ली थी इसलिए उसको हॉस्पिटल बुला लेने का मशवरा दिया। हम उसे हॉस्पिटल नहीं लाना चाहते थे क्योंकि मैं नही चाहती थी कि वो मुझे उस हालत में देख कर परेशान हो। आखिर वो हॉस्पिटल आ ही गई और दौड़ कर गले लगी, तभी मेरी ड्रिप पर उसका हाथ लगा। उसने गौर से देखा और पूछा “मम्मा आपको बहुत दर्द हो रहा है, मेरी आँखों से आँसू गिरने लगे। उसने मेरे आँसू पोंछ कर कहा, “आप जल्दी ठीक हो जाओगी – हैं ना नानी”? शायद मम्मी उसे समझा कर लाइ थी। उस पल मुझे लगा कि बेटियाँ कितनी जल्दी सयानी हो जाती हैं, उनके दिल में ममता, सहशीलता, और परिपक्वता भगवान पहले ही डालकर भेजता है। जब पापा ने उसे घर चलने को कहा तो उसने एक बार फिर मुझे गले लगाया, छोटी बहन को चूमा और नाना जी की उंगली पकड़े जाते हुए उनसे पूछ रही थी कि, “नानाजी- मम्मा घर कब आएंगी”?

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