बुलंद आत्मविश्वास से संवरता है हर अंदाज – पर्सनालिटी डेवलपमेंट टिप्स

बुलंद आत्मविश्वास से संवरता है हर अंदाज - पर्सनालिटी डेवलपमेंट टिप्स

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कुछ लोगों में काबिलियत तो होती है, पर खुद पर भरोसे की कमी उन्‍हें किसी भी क्षेत्र में औरों से पीछे कर देती है! इसलिए बुलंद आत्‍मविश्‍वास होना बेहद जरूरी है और इसे आसानी से विकसित किया जा सकता है।

जी हॉं साथियों, आज के दौर में कोई कार्य ऐसा नहीं है जिसे पूर्ण करना संभव न हो! अपना भविष्‍य संवारने के लिए कोशिश तो कर ही सकते हैं न?

जिंदगी में किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए हर पड़ाव पर आकर्षक व्‍यक्तित्‍व को निखारने के लिए सजी-संवरी प्रस्‍तुति, सूझ-बूझ, समझदारी और ज्ञान के अतिरिक्‍त भी एक खूबी है, जो इन सारी योग्‍यताओं से कहीं अधिक महत्‍वपूर्ण है! और वह है आत्‍मविश्‍वास। जहां इसका होना हर खूबी को निखार देता है, वहीं इसकी कमी बोलने से कहीं पहले, खड़े होने के तरीके तक से प्रकट हो जाती है। इसलिए आइए, खुद को निखारने के हर पहलू पर नजर डालते हैं और आत्‍मविश्‍वास को अधिक बुलंद करने की कोशिश करते हैं।

1.  भाव-भंगिमा पर विशेष रूप से ध्‍यान देना आवश्‍यक है

प्राय: देखा जाता है कि कुछ लोग झुककर खड़े होते है या झुककर बैठते हैं! तो इस स्थिति में वे थके और डरे-सहमे से नजर आते हैं। यदि आप भी इस तरह से बैठते या खड़े़ होते हैं! तो इस आदत में परिवर्तन लाना होगा ताकि जब भी किसी से बात करें या सभा आदि में उपस्थित हों तो सीधे तनकर बैठे। इस स्थिति में आप आत्‍मविश्‍वास से भरे नजर आएंगे। यह आदत एकदम से तो विकसित नहीं हो सकती! इसलिए सर्वप्रथम अपने घर से ही शुरूआत करनी होगी। जब भी आप घर पर टेलिविजन देखें या पढ़ने बैठें तो सीधे बैठने की आदत डाले! शीघ्र ही अच्‍छे परिणाम अनुभव करेंगे।

 2.  कुछ अतिरिक्‍त गतिविधि करें

सामान्‍य जीवन तो हम प्रतिदिन ही व्‍यतीत करते हैं! और रोज एक जैसी दिनचर्या का पालन करते-करते बोरियत भी तो महसूस होती ही है! तो इससे निज़ात पाने के लिए हम इसमें थोड़े से बदलाव करके अपनी जिंदगी को रंगीन तो बना ही सकते हैं। जैसे दिन के 24 घंटे में से 1 घंटे का वक्‍त अपनी रूचि को दें। इसमें अपनी रूचिनुसार ब्‍लॉग लिखना, पसंदीदा पुस्‍तकें पढ़ना या फिर मधुर संगीत सुनना और साथ ही पसंदीदा गीत गाना भी शामिल कर सकते हैं। यह 1 घंटा आपको एक नवीन ऊर्जा से भर देगा और आप स्‍वयं को पूर्ण आत्‍मविश्‍वास से भरा पाएंगे। शुरूआत के हफ्तों में 2 या 3 दिन समय निकालकर शुरू कर सकते हैं और फिर धीरे-धीरे दिन-प्रतिदिन के निरंतर अभ्‍यास से आपका यह प्रयास सफलता की दिशा में अग्रसर हो सकता है। जी हॉं साथियों, हमारे यही शौक हमें जिंदगी में किसी ऐसे क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर प्रदान कर सकते हैं! जो हमारे काम से बहुत अलग होता है और दिली सुकून भी देता है

3.  बात करने के अंदाज से बात संवारना

यह बिंदु तो हमारे व्‍यक्तित्‍व निखारने एवं आत्‍मविश्‍वास को बुलंद करने का महत्‍वपूर्ण साधन है, जिसके अभाव में हम जि़ंदगी की दौड़ में अधिकतर पिछे रह जाते हैं या कुछ कमतरता महसूस करते हैं। वर्तमान में इस स्‍पर्धात्‍मक युग में किसी भी क्षेत्र में स्‍वयं की जानकारी अनुसार अपनी बात स्‍पष्‍ट रूप से रखना तो आना ही चाहिए। इसलिए जब भी किसी से बात करें या अपनी बात रखें तो आपका लहजा नर्म या सहज रूप में होना और आराम से स्‍पष्‍टवक्‍ता के रूप में कहना आवश्‍यक है। सदैव कोशिश करें कि धीमी आवाज में और जल्‍दी-जल्‍दी न बोलें! और अपने हाव-भावों को हाथों के माध्‍यम से प्रदर्शित किया जा सकता है। साथ ही सकारात्‍मक रहते हुए अपनी भाषा का सटीक उच्‍चारण करें! जिसको रोजाना पढ़ने-लिखने की आदत के साथ विकसित किया जा सकता है ।

4.  किसी भी कार्य को पूर्ण करने हेतु छोटे-छोटे लक्ष्‍य निर्धारित करें

रोजमर्रा के तमाम कार्यों को पूर्ण करने के दौरान कई बार कुछ कार्य अपूर्ण रह जातें हैं! और अक्‍सर इन अपूर्ण कार्यों को पूर्ण न कर पाने का भय समाया रहता है, जो कभी-कभी आत्‍मविश्‍वास को कम करने का माध्‍यम बन जाता है। इसलिए हमेशा घर, बाहर और कार्यक्षेत्र के कार्यों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्‍य बनाकर उनके नियमित रूप से प्रबंधन के साथ आसानी से पूरा किया जा सकता है। इस तरह से नियमावली बनाने पर जब छोटी काम‍याबियां आपके कदम चूमेंगी! वहीं आपकी कमियों का अहसास होकर, आप उनमें सुधार करने का प्रयास कर सकेंगे और धीरे-धीरे ही सही पर जैसे-जैसे प्रत्‍येक कार्य पूर्ण होते जाएंगे! ठीक वैसे-वैसे आपमें पूर्ण सक्षमता के साथ बुलंद आत्‍मविश्‍वास की बढ़ोत्‍तरी होती जाएगी।

5.  स्‍वयं से आंखें मिलाएं

यह समस्‍या अधिकतर लोगों के साथ देखी जाती है कि वे आंखे मिलाकर बात नहीं कर पाते। वे आपस में बातचीत के दौरान इधर-उधर देखने लगते हैं! इससे सामने वाले व्‍यक्ति पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है और इस व्‍यक्तित्‍व के कारण जिंदगी की दौड़ में पिछे रह जाते हैं! साथ ही उनसे मिलना-जुलना कोई भी पसंद नहीं करता और इस आत्‍मविश्‍वास की कमी के कारण वे कभी-कभी हीन भावना से ग्रसित हो जाते है। ऐसे लोग किसी भी परिस्थिति का सामना करने से कतराते हैं! इसलिए रोजाना कम से कम 10 मिनट का समय निकालें और आईने में देखकर स्‍वयं से बातें करें। इसके निरंतर अभ्‍यास के लिए परिवार के सदस्‍यों या दोस्‍तों की सहायता ली जा सकती है। अपनी बातचीत को रिकॉर्ड करें ताकि आप अपनी भंगिमा, बात करने का तरीका और दूसरे पक्ष के साथ ऑंखे मिलाकर बातचीत करने वाले विश्‍वास को पाने में सक्षम होंगे।

इन सबके अतिरिक्‍त आप सुबह-शाम टहलने अवश्य जाए! यह आपके स्वास्थ्य के लिए हितकर तो है ही, साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि को बरकरार रखने में सहायक सिद्ध होगा। इस दौरान अपने संगी-साथियों एवं रिश्‍तेदारों से उचित तालमेल बिठाते हुए संवाद साधते रहिए! वर्तमान नजाकतता के अनुसार व्यक्तिगत न सही ऑनलाईन वार्तालाप जारी रखिएगा और फिर देखिएगा आपका अकेलापन तो दूर भागेगा ही! साथ ही आत्‍मविश्‍वास भी अधिक बुलंद होगा।

जी हॉं साथियों, इस दृढ़ आत्‍मविश्‍वास के बलबूते पर आप जीवन में कठिन से कठिन परि‍स्थितियों का सामना करने में सफल हो सकते हैं! सिर्फ आपको एक महत्‍वपूर्ण बात हमेशा जहन में रखना होगा! सबसे रखिएगा मेलमिलाप और सबके विचारों की समिक्षा भी कीजिएगा! लेकिन अपने विचारों को स्‍वतंत्र और स्‍पष्‍ट रूप से “सदा सुनो सबकी और करो अपने मन की” कहावत पर अमल करते हुए बुलंद आत्‍मविश्‍वास से हर क्षेत्र में अपने हर अंदाज़ को संवारते रहिएगा।

साथियों इस ब्‍लॉग के माध्‍यम से मैंने कुछ अपने मन की बात कहने की कोशिश जरूर की है! पर वह कोशिश तब सफल होगी, जब आप अपनी प्रतिक्रियाएं व्‍यक्‍त करेंगे और यदि मेरा लेखन पसंद करते हैं! तो आप मेरे अन्‍य ब्‍लॉग पढ़ने हेतु भी सदैव ही आमंत्रित हैं।

धन्‍यवाद आपका!

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