बच्चों को माँ की जरूरत है मेड की नहीं

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बच्चों को माँ की जरूरत है मेड की नहीं

मैं जहाँ रहती हूँ वहाँ ९०% माता-पिता नौकरी करते हैं और उनके बच्चों को मेड पालती है। जो बडे़ है वो अपना ख्याल रख लेते है पर जो छोटे हैं वो पूरी तरह से मेड के सहारे रहते हैं। मैने उन बच्चों को मेड के गंदे हाथों से खाना खाते देखा है। जिस हाथ से मेड खुजली करती है उन्ही हाथों से बच्चे को खाना खिलाती है। कोई चीज अगर जमीन पर गिर जाए तो उसे झाड़-पोछकर बच्चे को खिला देती है। बीमार होने पर बच्चों को रोते  देखा है मैने क्योंकि माँ को तो छुट्टी मिल नही सकती इसलिए बीमारी मे भी बच्चा मेड के पास रहता है।स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों को बाहर घंटो मस्ती करते हुए देखा है क्योकि घर पर तो कोई है ही नही पूछने वाला।

जरा सोच कर देखिये बीमार बच्चे को माँ की जरुरत है या मेड की।

ऐसे बच्चे टीवी और मोबाईल से भी चिपके रहते है क्योंकि कोई रोकने टोकने वाला नही होता। टीवी और मोबाईल पर बहुत सारी ऐसी चीजे होती है जो शायद बच्चों को नही देखनी चाहिए। मोबाईल से निकलने वाली रेडिएशन भी बच्चो के दिमाग को नुकसान पहुँचाती है। हद से ज्यादा  टीवी देखने से भी बच्चो की आँखों को नुकसान पहुँचता है। और आजकल बच्चे टीवी देखते- देखते खाना खाने का भी शौक रखते है जिससे वो ज्यादा खाना खा लेते है और मोटापे का शिकार हौ जाते है।

एक एेसे ही बच्चे के बारे मे बताऊँगी जिसके माँ- बाप नौकरी पर चले जाते और वो दादा-दादी के पास रहता। चौथी क्लास मे पढ़ता है। स्कूल से लौटने के बाद टीवी पर लग जाता। दादा-दादी की बात नही सुनता। जब टीवी से मन भर जाता तो मोबाईल लेकर बैठ जाता अपने दादाजी का। दादा-दादी सोचते की गेम खेलता है पर शायद आप यकीन नही करेंगे वो अश्लील विडियो देखता था। एक बार उसके दादा जी ने पकड़ लिया और उसके माता-पिता से बताया। माता-पिता ने बच्चे को डाटा फटकारा बस लेकिन माँ आज भी नौकरी करने जाती है। बच्चे से ज्यादा नौकरी पसंद है।

अब जरा सोचिए चौथी क्लास का बच्चा अगर अश्लील विडियो देख रहा है तो उसका भविष्य कहाँ जा रहा है।

आये दिन हमे ये सुनते है कि मेड बच्चे को पीटती है। एक छोटा सा बच्चा जो कुछ बता नही सकता ये सब सहता रहता है और डरा डरा सा रहता है। माँ को जब पता चलता है तो वो मेड को निकाल देती है और सीसीटीवी कैमरा लगवा देती है। फिर से उसकी तलाश शुरु हो जाती है नये मेड की।

बडे शहरों मे माता-पिता बच्चो को मेड के सहारे छोड़ कर नौकरी पर जाते है और मेड बच्चे को गंदे कपडे़ पहनाकर भीख मँगवाने ले जाती है या फिर बच्चे को अफीम खिला के सुला देती है और अपने प्रेमी को घर पर बुला कर मजे करती है।ऐसी और भी बहुत सारी बाते सुनने मे आती हैं।

कुछ बच्चों को तो शारिरिक और मानसिक शोषण भी सहना पड़ता है और वो डर के कारण कुछ कह नही पाते। अपने इस पोस्ट के माध्यम से मैं बस इतना ही कहना चाहती हूँ कि पूरी जिन्दगी पड़ी है नौकरी करने के लिए, पहले अपने बच्चे की परवरिश कीजिये ताकि उन्हे इस तरह की किसी तकलीफों से ना गुजरना पडे़।

एक माँ से अच्छी परवरिश अपने बच्चों की कोई नहीं कर सकता।

धन्यवाद

स्वाती कपिल गुप्ता

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