बच्चों को बात-बात पर तब तक रोक-टोक न करें जब तक कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान न पहुँचे

बच्चों को बात-बात पर तब तक रोक-टोक न करें जब तक कि उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान न पहुँचे

Last Updated on

यह आम तौर पर देखा गया है कि माता-पिता या घर के बड़े-बुजर्ग बच्चों को रोक-टोक करते हैं। ये मत करो, वो मत करो। अगर बच्चे काम में कुछ हाथ बंटाना चाहते हैं, तो उन्हें मना मत करें।उन्हें यह मत बोलें कि तुमसे नहीं होगा। तुमसे ग्लास फूट जाएगा या फिर काम बिगड़ जाएगा। इससे उनका विश्वास कमजोर हो जाएगा। अगर उनसे कुछ गलत भी हो जाए तो उनका हौसला बढ़ाएं, न कि उन्हें डांटें । उन्हें बोलें कि तुमने बहुत अच्छा किया। उन्हें तब तक मना न करें जब तक उन्हें शारीरिक या मानसिक नुकसान न हो। अगर किसी काम में खतरा हो तो बेशक उन्हें मना करें पर बात-बात पर किसी भी काम में मना न करें। इससे उनका विश्वास कमजोर हो जाएगा और वो किसी भी काम को करने से डरेंगे और उनमें लीडरशिप क्वालिटी भी कम हो जाएगी । इस संदर्भ में मैं आपसे एक सच्ची घटना का जिक्र करना चाहता हूँ । मुझे विश्वास है कि आपको पसंद आएगी । आपने एडिसन का नाम तो सुना ही होगा। हाँ-हाँ वही एडिसन जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया था। बचपन में उन्हें मंदबुद्धि समझा जाता था क्योंकि वो बहुत सवाल किया करते थे। वो चीजों को स्वीकार नहीं करते थे, जब तक उसे प्रूव नहीं किया जाता लेकिन लोग समझते थे कि उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा इसलिए बार बार प्रश्न कर रहा है। एक दिन उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाता है और एक लेटर उनकी माँ को भेजा जाता है कि हम आपके बेटे को स्कूल से निकाल रहे हैं क्योंकि वो बहुत ही मंदबुद्धि बालक है। उसे स्पेशल स्कूल की जरूरत है जहां मंदबुद्धि बच्चे पढ़ते हैं। जब एडिसन ने माँ से पूछा कि लेटर में क्या लिखा है तो माँ ने आंसू पोछेते हुए बोला कि लेटर में लिखा है कि आपका बेटा बहुत तेज है और हमारे टीचर उन्हें पढ़ाने में असमर्थ हैं इसलिए आप उन्हें घर पर पढ़ाएं। एडिसन बहुत खुश हुए। फिर जब वो बड़े होकर बहुत बड़े साइंटिस्ट बन गए तो एक दिन उन्हें अपने स्कूल का वो पुराना लेटर मिला जिसे पढ़ कर उनकी आँखों में आंसू आ गए। लेटर के अंत में उन्होंने लिखा कि एक माँ के विश्वास ने एक मंदबुद्धि बच्चे को सदी का महान वैज्ञानिक बना दिया। इसलिए कभी भी अपने बच्चे के विश्वास को न तोड़ें। आपका विश्वास ही उनके विश्वास का आधार है। सभी बच्चे अपने आप में विशिष्ट हैं, जरूरत है तो बस उनके टैलेंट को पहचानने की।

Disclaimer: The views, opinions and positions (including content in any form) expressed within this post are those of the author alone. The accuracy, completeness and validity of any statements made within this article are not guaranteed. We accept no liability for any errors, omissions or representations. The responsibility for intellectual property rights of this content rests with the author and any liability with regards to infringement of intellectual property rights remains with him/her.

Previous articleWhy Your Baby Is Not an Ego Project
Next article5 Grains That Should Be a Part of Your Growing Child’s Diet