बच्चे,बच्चे नही अब वयस्क हैं इसलिए ध्यान रखें।

बच्चे,बच्चे नही अब वयस्क हैं इसलिए ध्यान रखे।

बच्चे, बच्चे नहीं अब वयस्क हैं। मैं ऐसा इसलिए कह रही हूँ क्योंकि आज कल जब बच्चों की बातें सुनती हूँ तो समझ ही नहीं आता कि इतनी कम उम्र में इस तरीके की बातें इनके दिमाग में आती कैसे हैं? फिर सोचती हूँ जब TV, YouTube ,फिल्में इन सब पर यह चीजें खुलेआम दिखाई जाती हैं तो बच्चे को कुछ तो समझ में आएगा..

इसका एक और कारण मुझे लगता है बच्चों के हॉर्मोंस में जल्दी  बदलाव – मेरी माँ बताती हैं कि उनके समय में माहवारी – 14 से 16 साल की उम्र में शुरू होती थी। हमारे टाइम पर माहवारी – 12 से 13 की उम्र में होने लगी है, अब मैं देखती हूँ कि कई लड़कियों को माहवारी – 9 साल की उम्र में ही हो जाती माहवारी होने का सीधा-सीधा अर्थ है हॉर्मोन्स में बदलाव और  मैच्योरिटी की तरफ बढ़ना, अपॉजिट अट्रैक्शन,सुंदरता को लेकर कंसर्न होना और भी बहुत सारी चीजें।

कुछ घटनाएँ झझोर देती हैं, जैसे; कुछ ही समय पहले जल्दी-जल्दी हफ्ते में दो खबर मैंने न्यूज़पेपर में पढ़ी – दोनों रेप  की ही थी । जिनमें से एक खबर थी कि 3 बच्चों ने एक 6 साल की बच्ची का रेप किया और बच्चों की उम्र 9 से 12 साल थी। इसी तरह की एक दूसरी घटना अगले हफ्ते फिर आई यह घटनाएँ दिमाग को भन्ना देती है। 9 से 12 साल का बच्चा रेप कर रहा है तो आप सोच सकते हैं कि उनके दिमाग में कितनी गंदगी और भी हो सकती है?

मैंने कुछ साल पहले टयूशन पढ़ाया था, वहाँ आने वाले एक 6 साल के बच्चे ने मुझसे कहा “मैडम, मेरी क्लास में ना एक लड़की है उसे एक लड़के ने लव की चिट्ठी दी है”। मैं हैरान रह गई मैंने बोला क्या मतलब है इसका? वो बोला, मतलब वो लड़का उसके पीछे पड़ा है , इसके आगे मुझे समझ नही आया क्या बोलूं ? अगर सोचा जाए तो क्या कारण हो सकता है इसका?

एक कारण जग-जाहिर है – फिल्में, सीरियल, यूट्यूब – आप खुद सोचिए ‘भाभी जी घर पर हैं’ जैसे सिरियल जिसमे पड़ोसी की पत्नी के चक्कर मे रहते है दो पुरुष। बच्चे क्या सीखेंगे इससे?. बाकी सास-बहू सीरियल की बात तो ना ही करे तो बेहतर। एक महिला दो पुरुषों के सामने खड़े होकर यह कहे कि यह तुम्हारा नहीं इनका बेटा है और मेरी बेटी पूछे इनमे किसी को ये ही नहीं पता कि यह किसका बेटा है? बताइए क्या जवाब दें? इसलिए लगभग 4 साल से मैं कोई सीरियल नहीं देखती, तारक वाला देखने लगी तो उसमें जेठा – बबिता की equation बेटी को समझ नहीं आई तो वो भी छोड़ दिया। सोशल मीडिया की फ़िहरिस्त बहुत लंबी है।

एक और कारण जो मुझे समझ आया वो है बच्चो का अपने सीनियर्स को देखना। आप सोचिए आपका बच्चा प्राइमरी क्लास में है और स्कूल 12th तक है। जब बच्चा अपने सीनियर्स के कपल देखता है तो जिज्ञासु हो जाता है सब जानने के लिए। आप डांसिंग शो देखिए छोटे बच्चों को ऐसे मादक एक्सप्रेशन सिखाए जाते हैं जो उनकी मानसिक अवस्था से मेल नहीं खाते। सीरियल्स में छोटे-छोटे बच्चों से वह सब करवाया जाता है जो उनकी उम्र के हिसाब से बहुत ज्यादा होता है। उन छोटे बच्चों को TV में देखकर, देखने वाले बच्चे वही सब करने की कोशिश करते हैं।

हॉर्मोन्स, पर्यावरण इन सब पर हमारा कोई बस नहीं लेकिन दूसरे फैक्टर जो बच्चों को उम्र से पहले व्यस्क बनाते हैं, उन्हें दूर करने की कोशिश हम कर सकते हैं। उसके लिए सबसे पहले हमें ऐसी चीजों से दूर रहना पड़ेगा जो बच्चों के मन में अजीबोगरीब सवाल उत्पन्न करते हैं,जैसे; मैं सॉन्ग्स कभी TV पर नहीं देखती केवल सुनती हूँ, वह भी डांसिंग सॉन्ग्स, मैं कोई सास बहू सीरियल नहीं देखती हूँ. खेलों पर आधारित फिल्में ही बेटी को देखने को कहती हूँ या एनीमेशन। बेटी बहुत सी चीज़े समझ गई है, सवाल भी करती है। हम उसका ध्यान बांटने की कोशिश भी करते हैं, कुछ हद तक सफल भी होते हैं लेकिन पूरी तरह नहीं।

कुल मिला कर बात इतनी सी है कि अब प्राइमरी स्कूल के बच्चो को बच्चा ना समझें,उनके हाव-भाव पर निगाह रखें उनके दोस्तों पर निगाह रखें। TV ,YouTube पर क्या देखते हैं यह आपके ध्यान में जरूर रहे। बच्चे को अकेले बैठकर मोबाइल या tv देखना allowed ना करे।

अगर आपके पास इस समस्या का कोई औऱ भी समाधान है तो प्लीज कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।

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