फैलते अधियारे में क्यों अपने हाथ काले करने चले हैं आपलोग?

फैलते अधियारे में क्यों अपने हाथ काले करने चले हैं आपलोग?

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कोरोना वायरस के आते ही मुझे अब्दुल कलाम सर की एक बात याद आती है, उन्होंने कहा था कि मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि मैं कुछ चीजें नहीं बदल सकता। कोरोना वायरस आना लिखा था उसे कोई नहीं बदल सकता। बस आप सावधानी जरूर बरत सकते हैं, और जैसे कि मैं समझ पा रही, बेसिक कंसेप्ट बस इतना है कि आप साफ-सुथरे रहें। साफ-सुथरी जगह पर जाएं, साफ-सुथरी चीजों का इस्तेमाल करें, फ्रेश खाना खाएं, गरम खाना खाएं, गर्म पानी का इस्तेमाल करें। जितने आप गर्म एनवायरमेंट में रहेंगे, ये वायरस आप पर नहीं आने वाला है और ठंडी चीजों का इस्तेमाल कम करें।

आप तो सैनिटाइजर और मास्क खरीद पाने में सक्षम हैं । पर इस दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो मास्क ओर सैनिटाइजर खरीदने से ज्यादा यह सोचते हैं कि रोज इतना कमा सके कि अपने परिवार को दो वक्त की रोटी खिला सके! तो ये बात उन लोगों से कहना चाहूंगी कि आप इस कंडीशन का फायदा उठाकर सैनिटाइजर इतने महंगे दे रहे हैं तो एक गरीब इनसान कहां से उसका इस्तेमाल करेगा?

वो तो रोजाना उसी तरीके से काम कर रहें हैं, 10 चक्कर ऑटो के लगा कर बीस-तीस रुपए कमा कर, पैसा इखट्टा कर रात की रोटी लेकर जाएगा, ना कि मास्क और सैनिटाइजर। तो जो इस कंडीशन का फायदा उठाकर महंगे दे रहे हैं इस कंडीशन में आप उनका योगदान कीजिए ना कि उन्हें लूटें। और मैं उन लोगों से कहना चाहूंगी कि अगर आपके पास मास्क ओर सैनिटाइजर नहीं है तो कोई दिक्कत नहीं है, आपके पास साफ-सुथरा पानी है उससे आप नॉर्मल हैंडवॉश करते रहिए। साफ कपड़े पहनिए और बस खुदा सब देख रहें हैं, किसी के पास सब कुछ है फिर भी वो जान बचाने के लिए भाग रहा है और आपके पास कुछ नहीं है, फिर भी मस्त मौला आप ऑटो चला रहे हैं तो बस अपनी जिंदगी को इंज्वाय कीजिए।

रही कोरोना वायरस की बात तो हे गॉड! इसको दूर करोना, थैंक यू!

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