पापा भी हमें माँ जितना ही प्यार करते हैं, लव यू पापा

पापा भी हमें माँ जितना ही प्यार करते हैं, लव यू पापा

एक छोटी-सी दुनिया है जिसमें मैं हूँ और बस मेरे पापा और माँ है। मेरे पापा और माँ ने मुझे बहुत ही लाड-प्यार से पाला है क्योंकि मैं उनकी इकलौती बेटी हूँ। उन्होंने आज तक मेरी किसी भी ख्वाहिश को अधूरा नहीं छोड़ा। हमेशा से मेरी हर छोटी से छोटी जिद को पूरा किया है। लेकिन उन्होंने मेरी हर इच्छा को पूरी करने के लिए जो कष्ट सहे हैं मुझे हमेशा से ही उस बात से अनजान रखा।

एक दिन की बात है जब मैंने नई साइकिल लेने के लिए जिद पकड़ ली और उस जिद में खाना तक खाना छोड़ दिया। ये जानकर मेरे पापा को बहुत दुःख हुआ क्योंकि वो मुझे इस हालत में कभी भी देखना नहीं चाहते। और देखें भी कैसे अपनी इस लाडली बिटिया को रोते हुए। बस झट से मेरे पास आकर हाँ बोल दिया और कहा अगले महीने ही मैं अपनी गुड़िया रानी को साइकिल लाकर दूंगा और अपने हाथ से खाना खिलाने लगे। मैं बहुत खुश हुई कि पापा ने मेरी बात मान ली, लेकिन पापा के खुश चेहरे के पीछे का दर्द मैं समझ नहीं पाई।
मेरे पापा के पास ज्यादा पैसे नहीं थे। बस छोटा-मोटा काम करके दो टाइम का खाना हो जाता था। सेविंग्स तो जैसे शून्य थीं। अब हाँ तो बोल दिया अपने दिल के टुकड़े को लेकिन करें क्या जिससे कुछ पैसे जमा करके अपनी बिटिया को साइकिल लाकर दे सकें।
दिन बीतते चले गए। एक रात अचानक मेरी आँख खुली तो देखा माँ पापा को दरवाजे तक छोड़ने गई हुई थी। माँ से पूछा पापा इतनी रात को कहाँ जा रहे हैं तो माँ ने भी झूठ बोल कर ये कह कर टाल दिया कि आजकल पापा दिन की जगह रात को काम करते हैं और दिन में आराम करते हैं।  मैं भी भोली-सी, माँ की बातों में आ गई और सोने चली गई।
फिर एक दिन मैं स्कूल से जल्दी घर आ गई, देखा तो पापा की तबियत खराब थी और उनकी आँखों में आंसू थे। मैंने माँ-पापा को चुपके से बात करते हुए सुना। पापा बहुत परेशान थे और कह रहे थे कि मैं अपनी छोटी-सी गुड़िया को एक नई साइकिल तक नहीं दे सका क्योंकि जिस ठेकेदार के यहाँ वो रात को काम कर रहे थे उसने उन्हें काम से निकाल दिया था, और तो और जितना काम किया था उसके भी पैसे देने से मना कर दिया था।
उस दिन मुझे पता चला की पापा सिर्फ दिन में ही नहीं जबकि रात में भी ओवरटाइम कर रहे थे। वो भी इसलिए कि वो मुझे एक नई साइकिल दिला सकें। उस दिन मानो मेरी आँखों के सामने वो सब पल आ गए जब-जब मैंने उनसे कोई चीज पाने के लिए जिद की थी। मुझे समझ आ गया था, पापा ने हमेशा दिन-रात एक करके मेरे सारे सपने पूरे किए हैं और मैं उनके द्वारा सहे गए कष्ट को कभी समझ ही नई पाई। ये सब सोचते-सोचते पापा की नजर मुझ पर गई। जल्दी से उन्होंने अपने आंसू पोंछे और मुझे बुलाया। मैं झट से जाकर उनके गले लग गई और उनसे हर उस जिद के लिए माफी मांगी जो मैंने अनजाने में उनसे की थी।
अक्सर मैंने सिर्फ माँ के ऊपर लिखी गई शायरी, कविता और कहानी को पढ़ा है, पर पापा के ऊपर कोई कविता, कोई कहानी नहीं सुनी। हमें दुनिया की सारी ख़ुशी देने के लिए ना जाने पापा कितने दर्द सहते हैं। दिन-रात मेहनत करके काम करते हैं। फिर भी हम उन्हें थोड़ा-सा भी प्यार देने से कतराते हैं। उन्हें भी हक है प्यार पाने का। उन्हें भी ये महसूस कराने की जरूरत है कि हम भी उनसे बहुत प्यार करते हैं, उनकी इज्जत करते हैं। इसलिए आज मैं भी अपने पापा के लिए कुछ पंक्तियां लिखने जा रही हूँ।

माँ खाना पकाती है, लेकिन उस राशन को लाने के लिए जो कष्ट उठाते हैं वो पापा ही हैं।
माँ अपने हाथों से खिलाती है, लेकिन बिना कुछ खाए दिन-रात काम करते हैं वो पापा ही हैं।
माँ हर जिद पूरी करती है, लेकिन उस जिद को पूरा करने के लिए जो दर्द सहते हैं वो पापा ही हैं।
माँ हर बात सुनती है, लेकिन बिना कुछ सुने हमारी परेशानी को सुलझाते हैं वो पापा ही हैं।
माँ हमें पढ़ाती है, लेकिन हमारी स्कूल की फीस भरने के लिए जो पीड़ा उठाते हैं वो पापा ही हैं।
माँ हमारी हर ख्वाहिश जानती है, लेकिन उस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए जो मेहनत करते हैं वो पापा ही हैं।
माँ हमे हँसाती है, लेकिन हमें बिना बताए जो अपना गम छुपाते हैं वो पापा ही हैं।

लव यू पापा।

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