देश की बच्ची बचाओ – देश की बच्ची, देश का अभिमान

देश की बच्ची बचाओ - देश की बच्ची, देश का अभिमान

आजकल सुबह-शाम, दिन-रात बस हर जगह एक ही खबर दिखाई सुनाई पड़ती है कि आज एक बच्ची के साथ दरिंदो ने दुष्कर्म किया। कहानी भले एक ही रहेगी लेकिन हर रोज यही कहानी घटित होती है देश के कई कोने में, बस दरिंदे और पीड़ित बच्चियों के नाम और उम्र अलग होती है। “बेटी बचाओ” आंदोलन तो सफल हो चुका है, उन्हें माँ की कोख से तो बचा लिया गया लेकिन उसके बाद उनके सुरक्षा की ज़िम्मेदारी क्या खत्म हो गई है। कहने को सबसे सुरक्षित और पवित्र जगह जो मानी गई है वो है, घर, स्कूल और मंदिर लेकिन अब इस से भी विश्वास उठ गया है क्योंकि आजकल ना ही बच्चियां घर में सुरक्षित है ना ही स्कूल में और ना ही मंदिर में।

सबसे बड़ी बात जो परेशान करती है वो है लोगों के विचारधारा की जो सोचते है लड़कियों को पूरा बदन ढक कर चलना चाहिए । किसी भी लड़के के साथ घूमना नहीं चाहिए । किसी डिस्को अथवा पार्टी में नहीं जाना चाहिए । रात में बाहर नहीं निकलना चाहिए । ये सब बातें दिल पर एक गहरी चोट करती है। अगर लड़कियां अपनी मर्ज़ी से कहीं जा नहीं सकती, घूम नहीं सकती, कपड़े नहीं पहन सकती तो क्या फायदा इस बेटी बचाओ आंदोलन का। क्या फायदा उसे सिर्फ कोख से बचाकर पैदा करने का जब हम उसे ज़माने की बुरी नज़र और दरिंदो के हाथ से नहीं बचा सकते।

हो गई हूँ परेशान, सुनकर रोज यही बखान,
इस बात ने कर दिया है मुझे बहुत हैरान,
कि आज किस राह पर चल पड़ा है इंसान,
क्यों किसी बच्ची की छीन रहा है मुस्कान,
अपनी इंसानियत छोड़ क्यों बन रहा है हैवान,
क्यों जीती जागती बच्ची को बना रहा है बेजान,
जाए भी तो जाए कहाँ, ना स्कूल सुरक्षित न मकान,
क्यों पवित्र मंदिर का भी कर रहा है अपमान।
क्यों लड़कियों के कपड़े पर दे रहा बेतुका बयान,
क्यों नेता भी सब जानकर बन रहे अनजान,
क्यों बच्ची की सुरक्षा के लिए नहीं कर रहें कुछ इंतज़ाम,
कहाँ गए वो लोग जो बोलते थे बेटी है देश की शान,
क्यों उसकी आबरू लूटने पर देश अभी तक है शांत।
क्यों ना दरिंदो को फाँसी देकर, बढ़ाए बच्चियों का मान,
फिर मिलकर एक नारा लगाए, देश की बच्ची, देश का अभिमान।

मैं अपने ब्लोग्स के जरिए कोशिश करती हूँ सामाजिक समस्याओं को आप लोगों तक पहुँचाने की। पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। ?

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