देखभाल की जरूरत सिर्फ बच्चे को नहीं, नई माँ को भी है

देखभाल की जरूरत सिर्फ बच्चे को नहीं, नई माँ को भी है

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आज भी याद है मुझे जब मेरी नन्ही सी गुड़िया का जन्म हुआ था, कितनी डरी हुई थी मैं। मेरे दिमाग में बस यही एक बात थी कि सब कुछ ठीक हो, और यही पूछा था मैंने डॉक्टर से भी। उन्होंने इसके उत्तर में बस सिर पर हाथ फेरा और मुस्कुरा कर कहा कि हाँ सब ठीक है। यूं तो मेरा सी-सेक्शन था, तो प्रसव पीड़ा के बारे में दूर-दूर तक कोई अंदाजा न था, मैं खुश थी कि चलो आखिरकार मैं बिना किसी प्रसव पीड़ा के माँ बन गई।

डिलीवरी मायके में हुई थी इसीलिए शुरू का एक डेढ़ महीना आराम से बीत गया, माँ के पास रहो तो आधी तकलीफ तो पता ही नहीं चलती, समय पर दवाई, हाथ में गर्म दूध का गिलास, रात में नींद न हो पाए तो दिन में कभी भी सो जाना, ये सब सुख तो बस मायके में ही जी पाती है औरत। खैर, ससुराल जाने का समय आया तो माँ ने बहुत सारे गुड़ के लड्डू , भुंजी हल्दी और भी कई प्रकार की खाने पीने की देसी चीजें रख दीं, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थवर्धक भी थीं।
लेकिन जैसा कि सभी के साथ होता है, घर-गृहस्थी में रमने के बाद हम अक्सर अपने आपको भूल जाते हैं। वही हुआ, घर में सुबह से लेकर रात तक काम और सबकी सेवा में मैंने अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखा, जिसका नतीजा ये हुआ कि धीरे-धीरे मेरी तबीयत बिगड़ने लगी। न काम करने की ताकत शरीर में थी, न ही बेटी को दूध पिलाने की। डॉक्टर को दिखाया तो पता चला शरीर में खून की कमी हो गई है, डॉक्टर ने तुरंत ड्रिप लगाई और ढेरों दवाइयां लिख दीं। आयरन की कमी के चलते बालों का झड़ना भी अपनी सीमा पार कर चुका था। माँ को जब पता चला कि उनके दिए हुए लड्डू और हल्दी, बड़ी मैंने नहीं खाई है, तो बहुत नाराज हुईं। मेरे ये कहने पर कि मुझे समय ही नहीं मिलता, उन्होंने मुझे समझाया कि माँ बनना तो आसान है, लेकिन कठिन है उस रिश्ते को निभाना।
अगर मैं वाकई अच्छी माँ बनना चाहती हूँ तो मुझे खुद का भी उतना ही खयाल रखना होगा जितना बाकियों का रखती हूँ। मेरे ये कहने पर कि सभी कहते हैं कि सी-सेक्शन से डिलीवरी में बहुत परहेज रखना होता है, और कोई कमजोरी भी नहीं आती, उन्होंने समझाया कि कमजोरी बस नॉर्मल डिलीवरी वाली माओं को ही नहीं होती, बल्कि हर नई माँ को होती है, और परहेज भी सभी को रखना होता है।
आखिर बच्चा तो दोनों का एक ही तरह से दूध पीता है न और जब बच्चा दूध पीता है, तो माँ के शरीर के सारी विटामिन, मिनरल्स, आयरन बच्चे को भी मिलते हैं। इसीलिए तो माँ का दूध सबसे अधिक ताकतवर होता है लेकिन बच्चे को ये सब सही मात्रा में तभी मिलेगा, जब माँ स्वस्थ होगी और सिर्फ बच्चे के लिए ही क्यों, मुझे अपने स्वयं के लिए भी अपना खयाल रखना चाहिए ।
सच ही तो है, हम माँ तो बन जाते हैं, लेकिन अक्सर ये भूल जाते हैं कि स्वस्थ बच्चे के लिए स्वस्थ माँ जरुरी है और माँ के खानपान का खयाल सबकी जिम्मेदारी है।

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