जीवन में आए हुए अनुभवों को संक्षिप्त कहानियों की माला में पिरोने की कोशिश

जीवन में आए हुए अनुभवों को संक्षिप्त कहानियों की माला में पिरोने की कोशिश

1. खुशियों के लिए अच्छी नई शुरूआत

गुड़ीपड़वा के दिन माँ ने कहा हम कोई भी शुभ काम करने से पहले पूजा-पाठ करके ईश्वर से उस काम के सफल होने की प्रार्थना करते हैं।  तुम्हें पता है जब मम्मा छोटी थी ना, यानी मैं, मौसी और छोटे मामा सब बहुत एक्साइटेड रहते थे। सुबह जल्दी उठते, अच्छे बच्चों की तरह बात मानते, पूरे दिन पढ़ाई करते, जिससे हम पूरे साल ऐसे ही काम करते हैं । अगर इस दिन मिस भी हो गया तो कोई बात नहीं बेटी, जीवन में खुशियों के लिए अच्छी नई शुरुआत कभी भी की जा सकती है।

2. सावधान रहना आवश्यक

मुुुझे कार्यालय की तरफ से प्र‍शिक्षण हेतु मेरी सहेली सुषमा के साथ चेन्‍नई जाना पड़ा । हम लोग पहली बार ही जा रहे थे, इसलिए इतना अनुभव नहीं था । चेन्‍नई स्‍टेशन आने के दो धंटे पूर्व एकदम से सुुुुषमा का पर्स चोरी हो गया, उसमें जरूरी कागजात भी थे । इतने में आरपीएफ-पुलिस रेल में आई । वे शि‍कायत दर्ज कर ही रहे थे कि मैने रेल के दरवाजे के पास एक सज्‍जन के पास पर्स देखा, इससेे पहले क‍ि वह भागनेे की कोशि‍श करता पुलिस की सहायता से वह पकड़ा गया । मैंने सहमकर-सोचा सावधान रहना आवश्यक है।

3. खुशियों की नई शुरूआत का आगाज़

प्रभा के चले जाने से अशोक अकेले हो गए, उनकी नौकरी दूसरी जगह थी । दोनों बेटों की शादी रचा दी थी, बस चिंता थी, बेटी रचना की शादी की । माँ के जाने के बाद वह डिजाइनिंग के काम में व्‍यस्‍त रहती । दोनों बेटे अमेरिका में अपने व्‍यवसाय में व्‍यस्‍त थे ।

माँ की सलाह पर अशोक ने  विधवा सविता, वह गरीबों को पढ़ाती, सहारे के लिए उससे दोबारा शादी-रचाई । बेटी ने कहा, खुश-रहो पापा आप परिवार की सबसे-बड़ी ताकत हो । दादी ने इस तरह परिवार में खुशियों की नई शुरूआत का आगाज़ किया ।

4. माँ की दी हुई सीख

हम जब छोटे थे, तब ब्लॉक में सभी पड़ोसी एक-परिवार जैसे ही रहते थे । पड़ोस में एक आंटी अकेली रहती, पढ़ाती थी वे सरकारी स्कूल में । बेटा इंदौर में नौकरी करता था, हर हफ्ते आता-जाता था ।

इसी बीच आंटीजी को अचानक हार्टबीट की परेशानी होने लगी, बेटे को तनाव होगा इसलिए बताया नहीं, तकलीफ बहुत बढ़ गई तो, पड़ोसी अंकल-आंटी ने उनको तुरंत उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाया, बेटा बाद में आया । मैं स्कूल से आई, माँ ने बताया, पड़ोसी की सहायता पहले करनी चाहिए बेटी । माँ की सीख आजतक जीवन में अपना रहीं हूं ।

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