जीवन के अलग-अलग रंगों से सजी हुई मनमोहक कहानियाँ

जीवन के अलग-अलग रंगों से सजी हुई मनमोहक कहानियाँ

1. जीवन के रंग

रंग बिरंगा त्यौहार मनाने की उत्सुकता सबसे ज़्यादा छोटे बच्चों को रहती है । रंगों से सराबोर माहौल में छोटी सी पूजा को भी रंग भरी पिचकारी, गुब्बारों से खेलने का बेसब्री से मन हो रहा है, पर खेले कैसे? वह मन मसोस कर रह गई । पापा तो रंग-पिचकारी-गुब्बारे लाना तो भूल गए, उन्हें पसंद जो नहीं था ।दोस्त ने कहा “आज दिल ना दुखाओ बच्ची का उसकी पसंद ही तो हमारी भी पसंद है न “?  पूजा ने पहली बार रंग-पिचकारी-गुब्बारे लेकर सबके साथ रंग दिया पापा को, अपने  मनमोहक रंगों से ।” यही जीवन के रंग  यादगार-पल हैं ।

2. सपनों में जीवित हो दादी

“दादी,  भले ही तुम इस दुनिया में नहीं हो”, लेकिन कैसे अपने जीवनकाल में हर कदम पर संघर्ष करके पाँचों बच्चों की परवरिश पूरी हिम्मत के साथ स्वयं ही कुशलतापूर्वक की है, आपके इस प्रेम-स्नेह को मैंने सदा ही प्रेरणार्थक संजीवनी बने यादगार के रूप में जीवित रखा  है ।  आपकी बचपन में सुनाई हुई, ढेर सारी प्रेरणास्पद कहानियों में पूतना और नटखट  कान्हा की अठखेलियाँ, आज भी मेरे सपने में हलचल करती हैं, आप यूँ ही मेरे सपनों में जीवित हो, दादी हमेशा के लिए ।

3. अचरज-अनमोल-उपहार

 पूजनीय दादी, माता-पिता, तीनों चाचा-चाची, इकलौती अविवाहित बुआ,  हम आठ बहनों में एक अनमोल भाई प्रसाद सब के साथ, दिपावली का त्यौहार हर साल इंदौर में  मनाया जाता है। बुआ सबसे बड़ी थी परिवार में, सो नौकरी करते हुए सबकी परवरिश भी करती रही, वह अपने भाई-भाभियों के साथ ही हमें भी दिपावली का उपहार  दिया करती थी।एक दिन अचानक वह हमें हमेशा के लिए अकेले छोड़ गयीं।  जाने के बाद  पता चला,बुआ ने डाकघर में भतीजे-भतीजियों के नाम से बचत की है, यह अचरज-अनमोल-उपहार यादगार-रूप में जीवित है ।

4. बुलंद हौसलों को मिले सहायता

ज्योति गुमसुम सी कक्षा में बैठी सोच रही थी, मुझे क्रिकेट में रूचि होते हुए भी पापा खेलने से रोकते हैं ,गाँव में पढ़ रही हूँ तो क्या हुआ? मैं भी अपने हौसले बुलंद रखते हुए कामयाबी की उड़ान भर सकती हूँ। महिला क्रिकेट की सचिन कहलाने वाली, टीम इंडिया की कप्तान मिताली राज जैसा खेलना है मुझे। इतने में खेल शिक्षिका आईं, घर गई माता-पिता से मिलने ।शिक्षिका ने  कहा “भारत की बेटियों में बहुत दम” है। बस जरूरत है, हमें उनके हौसले की उड़ान को पूरा करने में सहायता कर उनके  विकास हेतु  जागरूक होने की।

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