जरूर बताएं अपने बच्चों को गुड टच, बैड टच क्या है।

पिछले साल की बात है,  मेरी यु.के.जी. क्लास में एक लड़की थी यामी, सत्र के शुरूआत में चंचल, खुशमिजाज लड़की कुछ महीनों बाद शांत और अंतर्मुखी हो गई थी। मैंने पैरेंट्स मीटिंग में उसकी माँ से परेशानी का कारण पूछा, उन्होंने कहा, “ऐसी तो कोई बात नहीं। कुछ दिनों पहले बीमार थी इसलिए शांत लग रही होगी आपको।”

मुझे तसल्ली नहीं हुई। अगले दिन से मैंने उसकी काउंसलिंग शुरू की क्लास के बच्चे मेरे साथ बहुत ज्यादा घुले मिले थे। परन्तु फिर भी उस बच्ची के मन की बात नहीं निकलवा पायी। कुछ गड़बड़ है ये तो पता चल रहा था।
एक दिन मैं बच्चों को गुड टच, बैड टच के बारे में बता रही थी। उस दिन लंच टाइम में यामी मेरे पास आयी। उसने मुझसे पूछा, “मैम अगर कोई प्राइवेट बॉडी पार्ट में टच करे तो क्या मैं आपको बता सकती हूँ?”
मैंने कहा,” हाँ बेटा, आप मुझे, अपनी मम्मा, पापा, दादी किसी को भी बता सकती हो।”
उसने कहा, “नही मम्मा नही मानेंगी। वो चाचू की ही बात मानती है।”
“अच्छा आप मुझे बताओ क्या हुआ?” मैंने कहा।
“चाचू जब मुझे पढ़ाते है गोद में लेकर बैठते है और जोर-जोर से टच करते है। किस भी करते है जोर से।”
“आपने मम्मा को ये सारी बात बतायी।” मैंने पूछा।
 तो उसने ‘ना’ में सिर हिलाया।
मैंने अगले दिन उसकी माँ को स्कूल बुलाया, सारी बात सुनकर वो बोली, “मैम वो ना पढ़ने के बहाने बनाती है। जॉइंट फैमिली है हमारी, मेरे पास यामी को पढ़ाने का समय नहीं होता इसलिए अजय, मेरा देवर उसे पढ़ाता है। शुरू में तो उसके पास ठीक से पढ़ती थी पर अब वो पढ़ना ही नहीं चाहती। मैंने उनको समझाया दरअसल यामी को समझ ही नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या गलत हो रहा है। क्योंकि यह सब उसे अच्छा नहीं लगता था तो वो अजय से दूर भाग रही थी और आपको लगा कि वो पढ़ाई से भाग रही है। आप लोगों ने उसे डाँटा तो वो आप से कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटापाई, अब उसका ख्याल कीजिए, उस पर भरोसा कीजिए।
 यौन शोषण के ज्यादातर मामलों में आरोपी कोई जानकार, करीबी या ‘अपना’ होता है और जरूरी नहीं कि यौन शोषण सिर्फ लड़कियों का ही हो। लड़के भी इसके शिकार होते है। यौन शोषण के मामलों मे 54℅ शिकार बच्चे लड़के होते है।
हमें बच्चों को बचपन से ही सही तरीके से खाना खाना, कपड़े पहनना, ब्रश करना, खुद से नहाना,बड़ों का आदर करना आदि बातें सिखाने के साथ ही उसे ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में बताना चाहिए। छोटी उम्र में ही बच्चों को किस पर यकीन करना चाहिए, किस पर नहीं सिखाना चाहिए। अनजान व्यक्ति के साथ नहीं जाना चाहिए उनसे कुछ भी खाने की चीज नहीं लेनी चाहिए।
ये बहुत ही संवेदनशील विषय है, इसलिए इस बारे में बच्चे को बहुत धैर्य से जानकारी देनी चाहिए। कई बार बच्चों को ये बातें समझाना मुश्किल होता है। उसे प्राइवेट पार्ट्स के बारे में बताएं और समझाएं कि उसे इस जगह पर उसके अलावा कोई दूसरा नहीं छू सकता है।
1.बच्चों से हर तरह की बात करें। गुड टच बैड टच के बारे में बताएं।
2. बच्चों के साथ आपका दोस्त सा व्यवहार हो जिससे कि वो अपनी हर बात आपसे बिना झिझक के कहें।
3. आप कितना भी थके हो या व्यस्त हो, लेकिन बच्चों की बातें ध्यान से सुनें।
4. बच्चे के साथ आपका कम्यूनिकेशन अच्छा हो।
5. बच्चों बड़ों की रिस्पेक्ट करें परन्तु इसकी आड़ में कोई फायदा न उठाए। बच्चों को बताएं कि अगर कोई आपके साथ जरा भी गलत करें तो आप न कह सकते है इसमें कुछ गलत नही है।
6. कोई भी व्यक्ति अगर ज्यादा और बेमतलब बच्चे में रूचि ले रहा है, उस पर नजर रखें।
7. स्कूल वैन हो या कोई भी व्हीकल, बच्चों को कभी भी अकेला न छोड़ें।
8. समाचारपत्र तथा टी.वी.पर आने वाली खबरों के बारे में अपने बच्चों से बात करें और उन्हें उस स्थिति से बचने के उपाय के बारे में भी बतायें।
9. अगर कोई कहे कि कोई बात मम्मी या पापा को नहीं बताना तो बच्चों को सिखाएं कि वे उन्हें जरूर बताएं।
10. अगर बच्चा किसी के साथ या किसी के घर न जाना चाहें तो जबरदस्ती न करें, हो सकता है उसमें कुछ बात छुपी हो।
11. सबसे जरूरी बात अपने बच्चों पर भरोसा करें।
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