जब बीच बाजार में चींटी पेंट में घुस गई..और मचाया शोर ??

जब बीच बाजार में चींटी पेंट में घुस गई..और मचाया शोर

एक बार कोलकाता से मेरे मामा-मामी और उनका 6 साल का बेटा सोहम जिसे हम प्यार से सोनू बुलाते हैं आए हुवे थे। मम्मी ने मुझे बाजार से कुछ सामान लाने को कहा तो सोनू भी साथ में चलने की जिद करने लगा। मैं उसके साथ खेलती और बहुत मस्ती करती हूं ना तो मेरे साथ रहना उसे अच्छा लगता है। लेकिन बाजार घर से थोड़ा दूर था सोचा वो इतना दूर पैदल नही चल पाएगा। तो मैंने उसे मना किया कि गोदी नही लुंगी मैं, पैर दर्द करेंगे तुम्हारे, मैं तुम्हारे लिए चॉकलेट्स लेकर आऊँगी आदि। लेकिन वो नहीं माना रोने लगा उसे रोते देख मुझसे भी रहा नही गया और मैंने उसे चलने को कह दिया। हिदायत के साथ के गोदी नही लूंगी पैदल चलना होगा।



वो मान गया सारे रास्ते न जाने कितने उलट-पलट सवाल पूछता और अपनी बातें बता रहा था। उसकी बातें प्यारी थी लेकिन बहुत सारी थी। हम मार्केट पहुँच गए सामान लिया उसको चॉकलेट और आइस क्रीम दिलाई और घर की तरफ आ रहे थे कि तभी सोनू भरे बाजार में चिलाया ” चींटी काटा..चींटी काटा बहुत जोर से चींटी काटा”। मै भी हड़बड़ा गयी और पूछा “क्या हुआ कहां क्या काटा”। वो तो बस कूदते हुए बोले जा रहा था ” चींटी काटा.. चींटी काटा”। मैंने उसे शान्त करते हुवे पूछा “कहाँ काटी है चींटी तुम्हें बताओ मुझे”।



उसने घूमते हुए अपने हिप्स की तरफ इशारा करते हुए कहता है “यहाँ काटा निकालो जल्दी से”। मुझे उस मासूम की बात सुन के एक बार तो बहुत जोर से हँसी आयी फिर मैंने उसके हिप्स के ऊपर हाथ फेरते हुवे कहा” ये लो अब ठीक है अब नही काटेगी चलो अब”। लेकिन सोनू तो चिलाने लगा नहीं “आप चींटी को निकालो जल्दी काट रही है”। अब मै क्या करती भरे बाजार में मैने फिर से हाथ से झड़काया और कहा “घर चलो वहाँ निकाल दूँगी अभी कैसे निकालू, और अब नही काटेगी ,नही है कोई चींटी”।

लेकिन सोनू कहां मानने वाला था उसने अपने छोटे-छोटे हाथों की अंगुलियों से चिकोटी बनाते हुवे कहा “दीदी मैं पेंट नीचे करता हूं आप ऐसे पकड़ के ऐसे निकाल दो”। ये कहते हुए वो अपनी पेन्ट नीचे कर ही रहा था कि मैने झट से उसकी पेन्ट ऊपर करते हुवे कहा “नहीं यहाँ सबके सामने शेम-शेम हो जाएगी”। मुझे एक तरफ उसकी बातों और उसके किये इशारों पर बहुत हंसी आ रही थी तो दूसरी तरफ परेशान भी हो रही थी कि करूं क्या। मेरे हँसने पर वो भी हंस रहा था रो नहीं रह था तो ये बात तो पक्की थी कि अब उसे कुछ काट नही रहा। लेकिन बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल काम है।




अब वो बार – बार हाथ से इशारा करे जा रहा था और चिलाये जा रहा था ” ऐसे पकड़के निकाल दो चींटी काट रहा है मुझे”। और अपनी पेन्ट नीचे करने लगा फिर मैंने एक हाथ से उसका मुँह बंद किया दूसरे हाथ से उसको और सामान के बैग को उठाया और एक किनारे ले आयी और बोली”अब बताओ कहाँ है चींटी कहाँ काट रही है, तुम खुद ही ऐसे पकड़ के (चिकोटी का इशारा करते हुए) उसे निकाल लो”। तब सोनू ने कहा “नही आप निकालो.. अब नही काट रही”। ये सुन मेरी सांस में सांस आयी और उसे चलने को कहा।

सोनू ने कहा “नही ..चलूँगा तो फिर काटा तो.. आप गोदी ले लो”। तो मैंने कहा “गोदी कैसे लूं मैं, हाथ में सामान भी तो है”, “अब घर पास ही है जल्दी पहुँच जायेगे”। लेकिन वो कहा मानने वाला था कहने लगा “आपने चींटी निकाली नहीं वो फिर से काटेगी तो मेरी मम्मी निकाल देगी, आप गोदी लेके चलो”। अब मेरे पास कोई उपाय नही था देर भी बहुत हो चुकी थी और सोनू मानने वाला भी नहीं था। उसे गोद में लिया सामान पकड़ा और घर आगयी। थक गई थी बहुत लेकिन सबको जब ” चींटी काटा” वाली बात बताई तो  सब हँसने लगे। सोनू अपनी मम्मी को कहता हैं “मैने दीदी को बताया ऐसे निकालो , इनको आता ही नहीं निकालना” ये सुन हम सब हँसने लगे। आज भी वो बात याद करती हूं और सोनू जो अब बड़ा हो गया है उसे बताती हूँ तो हँसे बिना नही रह पाती।





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