छोटे बच्चों के साथ यात्रा कितना सही है – मेरा अपना अनुभव

छोटे बच्चों के साथ यात्रा कितना सही है - मेरा अपना अनुभव

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बच्चा होने के बाद हम सभी सोचते हैं कि कहीं घूमने जाएंगे, पर ये कितना सही है, हम को जाना चाहिए या नहीं, कितने समय बाद हम यात्रा करें, ये प्रश्न भी हमारे दिमाग में चलते हैं। कोविड के कारण हम परिवार से भी नहीं मिल पा रहे हैं।

मेरा 6 महीने का बच्चा है। बेबी होने के बाद मुझको भी लगता था कि कहीं घूमना चाहिए या नहीं, अब जबकि बच्चा 6 महीने का हो गया, मैं ओर मेरे पति पूरी सावधानी से बच्चे के साथ निकल पड़े हरिद्वार, जहाँ मेरे सास-ससुर रहते थे।

गर्मी का मौसम था, हमको घर से निकलते हुए 12 बज गए यानी दोपहर, रास्ते में रुकके हमने खाना खाया। कुछ घंटों की यात्रा के बाद उत्तराखंड सीमा आ गई, जहाँ कोविड के कारण कुछ फॉर्मेलिटीज पूरी की, वहाँ पर भी 2 घंटे लग गए। गर्मी करीब 36 डिग्री के आसपास होगी। 7 घंटों का सफर करके हम हरिद्वार पहुँच गए।

अगले दिन सफर में गर्मी के कारण मेरे बच्चे को दस्त हो गए और बुखार भी हो गया। हमने तुरंत इलाज करवा लिया पर मुझको अपनी गलती का भी अहसास हुआ।

मुझको सबक ये मिला कि छोटे बच्चे के साथ कभी भी न ज्यादा गर्मी में व न ज्यादा सर्दी में यात्रा करनी चाहिए।
ज्यादा जरूरी हो तो ही बच्चे के साथ यात्रा करें वरना बच्चे के थोड़ा बड़े होने पर, वो भी डॉक्टर की सलाह पर।

सावधानियां

  • छोटे बच्चों के साथ यात्रा हमेशा अपने डॉक्टर के परामर्श से करें।
  • छोटे बच्चों पर सीधी धूप न लगने दें।
  • बच्चे को लू से बचाएं।
  • हमेशा सूती या होजरी के कपड़े ही पहनाएं।
  • बच्चे के साथ सारा जरूरत का सामान रखें।
  • छोटे बच्चे को अपना दूध पिलाती रहें ताकि बच्चे में पानी की कमी न हो।

ये मैंने अपने बच्चे के साथ पहली यात्रा में सीखा है, जो मैंने आपको बताया। बच्चे की सुरक्षा पहले है।

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