ऐसा बदला हमारा रिश्ता

ऐसा बदला हमारा रिश्ता

शिवानी क्या हुआतू रो क्यों रही हैशिवानी (मनेद्र की पत्नीबस सिंगारदान के आईने के सामने बैठी बस रोये जा रही थी। निया (शिवानी की बचपन की सहेलीके बार बार पूछने पर शिवानी केवल इतना ही बोली तुम चली जाओ यहाँ से मुझे किसी से बात नही करनीअरे बताओ न शिवानी आखिर बात क्या है शायद मै तुम्हारी हैल्प कर सकूँ निया नें शिवानी की आँसू पोछते और उसकी पीठ थपथपाते हुए पूछती है।

अब तुम्हे मै क्या बताऊँएक वक्त था जब मै हमेशा चहकती रहती थीखुश रहती थी। माँ पापा की लाडलीभैया भाभी का अभिमान हुआ करती थी। अपने घर को खुशियों से महकाना ये मुझे बहुत अच्छे से आता था। मै हमेशा दिल की गहराईयों से सोचतीरोज किनारे बैठ समुंदर से बातें करतीउनके साथ क्रीड़ा करतीहसती खिलखिलातीसमुंदर के पानी को अपने हथेलियों में ले उसे दूर तक उछालती। कितनी खुशी रहती थी मेरे चेहरे पर उस वक्तऔर इन खुशियों को दुगना होते देर न लगी जब मनेद्र मेरी जिंदगी में आए। मेरी ये खुशियाँ दिन व दिन और बढ़ती चली गयीकि तभी निया नें उससे बीच में टोकते हुए पूछा अच्छा शिवानी ये बताओ तुम दोनों आखिर मिले कैसेकब मिले और तुम दोनों प्यार कैसे हुआकब हुआ..। 

शिवानी अपने आपको आईने के सामने निहारते हुए कब वो आतीत के उन पन्नों में खो गई उसे पता ही नही चला। वो बोली निया मैने उन्हे पहली बार एक स्कूल के लाईब्रेरी के बाहर खड़ा देखा। वो किसी बच्चे के अभिभावक से बात कर रहे थे। मनेद्र हमारे ही स्कूल के गणित के टीचर थेवो एक बहुत अच्छे गणित के अध्यापकों में से एक थे। मै उस स्कूल के लाईब्रेरी में काम करती थी। मेरा काम किताबों की देखभाल करना और उन्हें उनकी सही जगह पर व्यवस्थित करना था। तब मेरी नजर इन पर(मनेद्र परपड़ी। पहली नजर में ही अपना दिल दे बैठी।

दिल की गहराईयों से बस उनके बारें में ही सोचतीपूरे स्कूल की लेडीज टीचर उनकी दीवानी थीउनकी बस एक झलक के लिए पाने के लिए पागल सी हो जाती थी। तो मेरी क्या बिसात थी जो मै उनको एक बार देखकर भी पागल न होऊँ। कुछ तो बात थी मनेद्र के चार्म में जो सभी को उनका होने से कोई खुद को रोक भी नही पाता था। मैने भी आगे की बड़ी जाॅब के लिए अप्लाई कर रखा था। जिसमें मुझे मैथ्स टीचर की आवश्यकता थी। और इससे अच्छा मौका मुझे कहाँ मिल सकता था। सो मैने भी मनेद्र से बात करने की कोशिश की। मनेद्र ज्यादा किसी से बात नही करते थे और खास तौरपर लेडीज टीचर से तो बिल्कुल भी नही या शायद ऐसा कहा जाए कि उन लेडीज टीचर्स में मनेद्र से बात करने की हिम्मत नही थी।

 मै मनेद्र के पास गयी और पूछा कि क्या वो मुझे गणित पढ़ा सकते हैं। एक मिनट के लिए वो चौंक गये थे और फिर उन्होने मुझसे पूछा जी??? फिर मैने उन्हे पूरी बात बताई कि मुझे उनसे मैथ्स पढ़ने की आवश्यकता क्यों हैबस फिर क्या था उन्होने हाँ कर दी और हम दोनों ज्यादा से ज्यादा टाईम एक साथ बिताने लगे। मै बस उनको देखती रहती और वो पूरे पोटेंशियल के साथ पढ़ाते। कभी उनके घर पर पढ़तेकभी वो मेरे घर पर पढ़ाते तो कभी किसी काॅफी शाॅप या रेस्टाराँ में पढ़ाते और मेरा पूरा ध्यान उनकी कलम से हटकर उनके ऊपर रहता। एक दिन मै अपने दिल के हाथों मजबूर हो उनसे अपने दिल की बात बता दी और यकीन मानो मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नही थी उनके हाँ की क्योंकि उन्होने मुझे ऐसा कोई सिग्नल ही नही दिया कि जिससे लगे कि वो भी मुझे अपना दिल दिये बैठे हैं। और फिर हमारी और हमारे घर की रजामंदी से हमारी शादी भी हो गई।

निया नें फिर टोकते हुए उससे पूछा कि जब सब सही चल रहा था तो फिर ऐसा क्या हुआ कि तुम इस तरह से रो रही थीकिसी से बात करने को तैयार नही थी। अपनी बचपन की सबसे अच्छी सहेली से भी नही। तुम्हारी माँ का फोन आया तो मै तुम्हे यहाँ देखने चली आई। शिवानी नें कहा मेरे इस कदर रोने की वजह हमारा बदलता रिश्ता…. निया नें चौंकते हुए पूछा बदलता रिश्ता क्या मतलब है तुम्हारा इस बदलते रिश्ते सेशिवानी बोली हमारी शादी के बाद हम बहुत खुश थे। ये शादी हमारे जीने का मकसद बन चुकी थी। मनेद्र रोज सुबह उठते ही मेरे चेहरे से ही अपने दिन की शुरूआत करते थे। बस हर वक्त मेरे करीब रहने के नये नये मौके ढ़ूँढ़ते थे। कभी स्कूल न जाने का बहानाकभी मेरे साथ किचन मेरी हैल्प करने का बहाना तो कभी तबियत खाराब होने का बहाना जिससे वो मेरे साथ समय बिता सकेंमेरे करीब रह सकें। और मै भी इनके बहानों को खूब समझती थी इसीलिए उनको अपनी कसम देकर रोज स्कूल भेज देती थी जिससे उन बच्चों के भविष्य पर कोई असर न पड़े। पर असर तो पड़ ही रहा था। वो बच्चों को मैथ्स पढ़ाने के बजाए उन्हे प्यार मोहब्बत के लैक्चर दे रहे थे। मुझे ही याद करने लगे थे।

ऐसा बदला हमारा रिश्ता

इसलिए प्रिंस्पल नें मुझे स्कूल बुलाया और उनके सारी करतूत बताया कि वो किस कदर बच्चों को बिगाड़ रहे हैं। मुझे समझ नही आ रहा था कि ये इनका कैसा प्यार हैफिर मेरे दिल ने कहा कि ये प्यार नही वासना है। जो अब मुझे ही खत्म करनी होगी। मुझे ही अपने हाथों से सजाए इस घर को तोड़ना होगा। जो स्कूल के लेडीज टीचर्स उन पर मर मिट्टती थी आज वही उनसे मुँह मोड़ दूसरी तरफ चली जाती है।मुझसे अब सहन नही हो रहा था उनका इस तरह अपमान। पर मै उन टीचर को रोकती तो मै ही गलत हो जाती। इसलिए मैने ये सोचा कि मनेद्र को कैसे रोका जाए। इस पागलपन सेइस वासना से क्योंकि ये शादी उनके कैरियर के साथ साथ बच्चों के भविष्य पर भी सवाल खड़ी कर रहे थे।

 फिर एक रात मैनें उनसे जान बूझकर जबरन कोई न कोई कारण लाकर उनसे झगड़ा किया और उसके बाद मैने उनको अपने करीब आने से रोक लिया। रोज मै अपने आप से लड़ती और फिर समझाती कि यही सही फैसला है। हमारा अलग होना ही सबके लिए एक बेहतर उपाय है। और इस तरह उनको उनसे रोज दूर करती चली गई। कभी उनको अपने करीब नही आने दिया। और अब वो स्कूल में भी अच्छे से ध्यान देने लगे। सबकुछ पहले जैसा हो गया। फिर से सभी लेडी टीचर उन पर मोहित होने लगी। फिर से वैसा ही हो गया जैसा पहले था। और मनेद्र भी और मनेद्र भी पहले जैसे शांत हो गये। अगर नही बदला तो केवल हमारा ये रिश्ता। निया अब हम अलग हो रहे हैं। कुछ नही बचा है अब इस रिश्ते मेंमनेद्र भी अब यहाँ नही रहते वो भी मुझे यहाँ छोड़कर चले गये। तो जानी ऐसे बदला हमारा रिश्ता निया नें उसे गले लगाते हुए कहा यार शिवानी तुम कितनी स्ट्राँग हो। तुमने उन बच्चों के भविष्य और मनेद्र के सम्मान के लिए तुमने खुद को उनसे दूर कर दिया। अपने प्यार की कुर्बानी दे दी। ये तो कोई भी नही कर सकता था। अगर मै तुम्हारी जगह होती तो इस तरह अपने प्यार को कभी नही जाने देती। पर जो तुमने किया है। आई सैल्यूट इटएंड आई प्राउड आॅफ यू एंड योर थिंकिग।

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