एक सक्रिय और समझदार माँ कैसे बनें – मातृत्व की जीवनशैली

आपने अक्सर लोगों से सुना होगा कि औरतों का जीवन संघर्ष से भरा होता है और अगर इतिहास देख लिया जाए तो यह बात समय-समय पर साबित भी होती रही है। हमें पुरुषों से पीछे रहना है, वे ही परिवार का मुख्य आधार होते हैं, अधिकतर यही परिवार में भी देखने को मिलता है। इस युग में जहाँ महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, हर जगह बराबरी से खड़ी हैं, फिर भी यह सोच खत्म नहीं हो पा रही है।

क्या कभी हम इस बात पर विचार करते हैं कि इसका क्या कारण है? क्यों यह मानसिकता समाज से खत्म नहीं हो पा रही है? इसका कारण हम खुद हैं और कोई नहीं, क्योंकि हमको पीछे रहने की आदत पड़ चुकी है और यही सीख हमसे हमारी संतानों में भी जाती है।

इसके साथ-साथ अधिकतर घरों में पल-पल हमें इस बात का एहसास कराया भी जाता रहता है कि घर की ज्यादा जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है। हम महिलाएं इस बात को मानती भी हैं, उसे मजबूरी का नाम देती हैं और सोचती हैं कि यह बात सही है।

पर हम लोग यह बात क्यूँ भूल जाती हैं कि जिम्मेदारी और मजबूरी में फर्क होता है। ईश्वर ने हमें यह जिम्मेदारी इसलिए दी है क्योंकि हम ही इसके लायक हैं। पर अब हमें खुद इनको बदलना होगा। सबसे पहले अपनी मानसिकता को बदलना होगा, खुद को बदलना होगा और शुरुआत अपने घर से ही करनी होगी। समय के साथ परिवर्तन ही परिवार को एक मजबूती देता है।

हम सभी के पास 24 घंटे ही होते हैं, उतने ही समय में हमें अपने और परिवार के लिए समय निकालना होता है। लेकिन कुछ लोग उनका इस्तेमाल ऐसे करते हैं कि दुनिया उनके काम को याद रखती है पर कुछ लोग अपना समय यह कह कर निकाल देते हैं कि समय ही नहीं मिला तो क्या काम करें पर हम ये भूल जाते हैं कि समय तो इतना ही रहेगा और इतने में ही सब कुछ करना है। तो किस तरह से खुद को और अपने परिवार को नई सोच के साथ आगे लेकर चलें।

आइए जानते हैं कैसे खुद को और अपने अमूल्य समय को व्यवस्थित करें:

पूरे दिन की दिनचर्या:

अगर आप बहुत छोटे बच्चे की माँ है तो बिल्कुल आपका पूूरा दिन बहुत व्यस्त होता है। बच्चे के सुुबह सो कर उठने से रात के सोने तक बहुत सारा काम होता है। बच्चे का खाना ,नहलाना ,साफ सफाई आदि पर खुद के लिए भी समय निकालना है।

  • अपनी दिनचर्या को नियमित करें
  • समय का ध्यान रखकर काम करें
  • अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत पर ध्यान जरूर दें
  • योगा या डांस को रोज के रुटीन में शामिल करें इससे हम अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत दोनों का भी ध्यान रखते हैं
  • किताबें पढ़ें या फिर अगर लिखने का शौक हो तो यह भी अपना सकती हैं
  • अपनी खूबसूरती पर भी ध्यान दें
  • प्रकृति से प्यार करें जैसे बागवानी आदि

साप्ताहिक दिनचर्या:

अब बात करें सप्ताह की, आप अपने काम को दिन के हिसाब से भी कर सकतीं है जैसे अगर आप अपने रोज के काम में बहुत ज्यादा व्यस्त रहती हैं तो अपने काम को दिन के हिसाब से रख लें। जैसे कौन सा काम कब करना है तो यह और भी आसान हो जाता है जैसे –

  • दो दिन योगा और डांस के लिए
  • स्पा या पार्लर जाएं
  • एक दिन घर की साफ-सफाई के लिए
  • एक दिन बागवानी के लिए आदि
  • सामाजिक बनेंं, लोगों से मिलें
  • घर पर छोटे-मोटे कार्यक्रम आयोजित करें

फिर देखिए आपका पूरा हफ्ता कैसे निकल जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा, आप बहुत अच्छा महसूस करेंगी। जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया और आपका आत्मविश्वास बढे़गा। अगर खुद को बदलना है, बच्चों को अच्छे और नियमित जीवन की सीख देनी है तो पहले खुद उसमें ढलना होगा, इस सोच से बाहर आना पड़ेगा कि हमारी जिदंगी तो अब कट गई। बच्चों को हर माता-पिता अच्छी ही शिक्षा देना चाहते हैं और याद रखें हम उनके साथ रहते हैं, वे हमें भी देखते हैं कि हम क्या करते हैं। इसलिए खुद पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी है।

आप अपनी राय भी रखें और जरूर बताएं इस विषय में आपकी क्या राय है।

धन्यवाद।

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