एक संडे बीवी के नाम

एक संडे बीवी के नाम

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क्षितिजा अपने ऑफिस के कामों के साथ-साथ अपने घर के कामों को भी बहुत अच्छे से करती थी। ऑफिस से उसे बस एक दिन की छुट्टी मिलती और उस दिन उसे घर के इतने और काम करने होते थे जो वह बाकी दिन नहीं कर पाती थी। उनका एक छोटा बच्चा भी था और क्षितिजा के पास एक ही दिन होता था जब वो अपने बच्चे की एक्स्ट्रा केयर कर पाती थी । इसी बीच संडे कब निकल जाता उसे पता ही नहीं चलता।

निखिल, जो अपनी बीवी से प्यार तो बहुत करता था पर उसकी क्षितिजा से एक ही शिकायत रहती कि उसके पास अपने पति को देने के लिए बिल्कुल समय नहीं है और इस कारण निखिल हर समय क्षितिजा से उखड़ा-उखड़ा रहता। क्षितिजा ने कई बार कोशिश की निखिल के ऐसे बर्ताव की वजह जानने की, पर निखिल हमेशा ये बोलकर घर से निकल जाता कि तुम अपना काम करो। क्षितिजा बेचारी बस यही सोच कर चुप हो जाती कि कभी तो निखिल अपनी परेशानी उसको बताएगा ओर इसी कारण धीरे-धीरे उनका रिश्ता कमजोर होता जा रहा था।

निखिल ओर क्षितिजा अपनी जाॅब के लिए दिल्ली में रहते थे और बाकी परिवार वाले गांव में। इसी बीच क्षितिजा की सास कुछ दिन उन दोनों के पास रहने आई। माँ को देखकर उन दोनों को बहुत खुशी हुई पर माँ तो आखिर माँ होती है। शैलजा जी ने उन दोनों के बीच आ रही उस दूरी को भांप लिया। शैलजा जी के आने से क्षितिजा को हर काम में बहुत मदद मिल जाती थी। वो उनके बच्चे को भी बहुत अच्छे से संभाल लेती पर शैलजा जी से अपने बच्चों के बीच की ये चुप्पी देखी नहीं जा रही थी। एक दिन जब निखिल रात में उनके पास बैठा था तो शैलजा जी ने उसे पूछ ही लिया कि आखिर क्या परेशानी है उन दोनों के बीच। तब निखिल ने अपनी माँ को सब बता दिया। शैलजा जी ने निखिल से पूछा कि क्या क्षितिजा बच्चे के होने से पहले भी ऐसी ही थी। निखिल ने कहा नहीं, पहले वो हमेशा मुझे समय देती थी, तो निखिल की माँ ने कहा बेटा एक बीवी जब माँ बन जाती है तो उसकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। साथ ही उसके शरीर में भी बहुत बदलाव आते हैं उन सब चीजों को एक साथ संभालने में उसे बहुत दिक्कतें आती हैं। इस समय में उसे सबसे ज्यादा जरुरत होती है अपनेपन की, प्यार की और वो उसे मिलता है उसके पति से। जब उसे तुम्हारे साथ की जरूरत है उस समय तुम उससे अगर कुछ उम्मीद लगाते हो तो वो तुम्हारी गलती है, तुम्हें उसे समझना चाहिए। हर संडे जैसे तुम्हें आराम की जरूरत होती है, उसके साथ रहने की जरूरत होती है, उसे भी होती होगी। ऐसे में तुम्हें उसे समय देना चाहिए, उसकी काम में मदद करनी चाहिए जिससे उसे अच्छा लगे और तुम दोनों को साथ में समय भी मिल सके और तुम्हारा साथ भी हमेशा बना रहे। तब निखिल को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी माँ से कहा गलती मेरी ही है, मैंने कभी क्षितिजा को समझने की कोशिश ही नहीं की। उसने मुझसे कई बार बात करने की कोशिश की पर मैंने उसकी कभी नहीं सुनी। अब मेरा हर संडे मेरी बीवी-बच्चे के लिए होगा और उनका मेरे लिए ताकि मैं उनकी हर शिकायत दूर कर सकूं और अब मैं हर काम में उसकी मदद करूँगा ताकि वो मेरे साथ-साथ अपने लिए भी समय निकाल सके। शुक्रिया माँ मेरा घर बचाने के लिए, नहीं तो शायद मैं अपनी प्यारी सी दुनिया खुद ही खराब कर लेता।

क्षितिजा यह सब खड़े-खड़े सुन रही थी और भगवान का धन्यवाद कर रही थी इतनी प्यारी सासु माँ देने के लिए।

सास की समझदारी से ऐसे मिला क्षितिजा को अपना संडे।

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