बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के नुस्के और रेसिपीज

बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के नुस्के और रेसिपीज
अक्सर माँओं को हम कहते हुए सुनते हैं कि मेरा बच्चा काफी जल्दी-जल्दी बीमार पड़ता है, मौसम या माहौल के बदलते ही बीमार हो जाता है। लगता है कि  शायद मेरे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है या कम होती जा रही है।आखिर ऐसा क्या है इस इम्युनिटी सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) में जिससे हमें इसकी इतनी अधिक जरुरत बचपन से लेकर जीवनपर्यन्त तक पड़ती है।
कई बार हम खुद भी देखते हैं  कि समान परिस्थिति में भी कुछ बच्चे अक्सर जल्दी बीमार हो जाते है तो वहीं कुछ बच्चे अच्छी रोग प्रतिरोधक शक्ति होने की वजह से लम्बे समय तक बीमार नहीं होते है।
 इसके पीछे का कारण यह है कि हमारे शरीर के आस-पास हर समय बैक्टीरिया और वायरस मौजूद होते है और हमारे शरीर की मजबूत  रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्युनिटी सिस्टम)  इन खतरनाक  बैक्टीरिया और वायरस से हमारे शरीर की रक्षा करती है। इसलिए  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय जानना बहुत जरुरी हो जाता है खासकर बच्चों में क्योंकि बच्चे शुरुआत से मजबूत बनेंगे, स्वस्थ रहेंगे तभी तो मजबूत देश व भविष्य का निर्माण होगा।
वैसे तो रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी  सिस्टम ) हर रोग के खिलाफ लड़ने में  मदद करती है। लेकिन कभी कभी इसके कार्य करने की क्षमता कम होती चली जाती है जिस वजह से रोगाणु, बैक्टीरिया और वायरस पीड़ित बच्चे के शरीर में प्रवेश करने लगते है और वो  गंभीर बीमारियों का शिकार होने लग जाते हैं।
हमारे शरीर की रोग  प्रतिरोधक क्षमता कई चीजो पर निर्भर करती है जैसे कि हमारा खान-पान और हमारी जीवनशैली। आज हम आपको रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित कुछ ज़रूरी जानकारी देने वाले हैं जिन्हे जानने के बाद आप सजग होकर बच्चों के इम्युनिटी सिस्टम का सही और संतुलित विकास कर पाएंगे:

इम्युनिटी सिस्टम मजबूत बनाने के लिए कुछ उपाय

१. स्तनपान कराने से बेहतर होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

मां का दूध जिसे बच्चे के लिए लगभग अमृत समान माना जाता है। यह बच्चे के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में काफी अहम भूमिका निभाता है। इसके अंदर इम्यूनिटी को चार्ज कर बच्चे को मजबूत बनाने के सारे गुण मौजूद होते हैं। साथ ही इससे बच्चे को संक्रमण, एलर्जी, निमोनिया, दिमागी बुखार, मूत्र मार्ग में संक्रमण की समस्य़ा और शिशु मृत्यु सिंड्रोम के खिलाफ लड़ने में मदद मिलती है।
साथ ही कई अध्ययनों में यह बात भी सामने आई है कि मां का दूध बच्चे के दिमाग की शक्ति को बढ़ाने और मधुमेह, कोलाइटिस और कैंसर तक से रक्षा करने में मदद करता है।
इसलिए हर मां को अपने बच्चे को करीब 6 माह तक अपने स्तनों से निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध जरूर पिलाना चाहिए। इससे बच्चा काफी मजबूत बनता है और छोटी-मोटी बीमारियां अगर उसे होती भी हैं तो बहुत कम होती हैं और बहुत जल्दी ठीक भी हो जाती हैं ।

२. बच्चों को बाहर खेलने जरूर भेजें

छोटे बच्चों को पूरा दिन घर में ही न रखें हमेशा ऐसी या बंद घर में रहने से भी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है क्योंकि कभी फिर उन्हें जब बाहरी वातावरण का सामना करना पड़ता है तो वो तुरंत बीमार पड़ जाते हैं। छोटे बच्चों को रोज़ पार्क में जरूर ले जाएँ,खुली हवा और मिट्टी में उन्हें खेलने दें अन्य बच्चों के साथ घुलने मिलने दें ये सब गतिविधियां भी बच्चे के इम्यून सिस्टम के विकास में अहम् भूमिका निभाती हैं। बच्चों को हर तरह के वातावरण में रहने की आदत होनी चाहिए इससे उनका शरीर और इम्युनिटी मजबूत बनते हैं।

३. बच्चों के साथ कसरत करें उन्हें सक्रिय रखें

हमेशा के लिए अपने बच्चे को फिट बनाना है तो हमें भी उसके लिए सक्रिय होना होगा। उसके लिए सबसे जरूरी है कि हम बच्चों के लिए उनके रोल मॉडल बनें। पहले खुद व्यायाम करें और बच्चों को भी अपने साथ खेल-खेल में कसरत शुरू करवाएं। इससे बच्चों में एक अच्छी आदत तो पड़ेगी ही जिससे वह हमेशा तंदरुस्त बने रहेंगे।
इसके अलावा कई शोधो में ये बात सामने आई है कि नियमित कसरत करने से  कोशिकाओं की संख्या में भी इजाफा होता है। वैसे आप चाहें तो एक्सरसाइज की जगह पर अपने बच्चे को साथ टहलने ,  स्केटिंग, बास्केट बॉल और टेनिस आदि में भी शामिल कर सकते हैं।कसरत और खेलकूद से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बहुत सकारात्मक असर पड़ता है।

४. बच्चों में साफ़-सफाई से रहने की आदत शुरू से डालें

जब भी बाहर से खेल कर या घूम कर आयें तो बच्चों में हाथ-मुँह-पैर धोकर कपडे बदलने की आदत जरूर डालें और पहले ये आप स्वयं करें क्योंकि बच्चे आपको देखकर सीखते हैं इसलिए जब आप ये नियमित रूप से करेंगे तो वो भी जरूर सीखेंगे।उन्हें खेलने-कूदने दीजिये पर घर आकर हाथ धोने को कहना मत भूलिए, इसी तरह से टॉयलेट के बाद, खाना खाने के पहले और बाद में भी अच्छी तरह से हाथ धोने की आदत भी बच्चों को अवश्य सिखाएं।ये साफ़-सफाई की आदतें भी बच्चों को स्वस्थ रहने में मददगार होती हैं और जो भी कीटाणु ,बैक्टीरिया आदि वो अपने साथ खेलने-घूमने के दौरान ले आए थे वो सब धोने से ख़त्म हो जाते हैं।

५. बच्चे की नींद पूरी हो इस बात का ध्यान रखें

छोटे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा नींद की जरूरत होती है। आपका बच्चा ज्यादा छोटा है तो उसे ज्यादा नींद की जरूरत है । वहीं अगर थोड़ा सा बड़ा है तो उसे 10 से 12 घंटे की नींद लेना बहुत जरूरी है। अक्सर देखा गया है कि नींद ना पूरे होने के कारण बच्चों की इम्युनिटी पर असर जरूर पड़ता है ।वो कमजोर हो जाते है और फिर  ज्यादा बीमार पड़ते हैं।  ऐसे में बच्चे के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए उनकी नींद का पूरा ख्याल रखें। अगर बच्चा दिन में नहीं सो रहा है तो उसे रात में जल्दी सुला दें।

६. बच्चों को सही और संतुलित आहार दें

शुरूआत से ही बच्चे को फल और सब्जियां खिलाने की आदत डालें।  याद रखें कि छोटे बच्चे ज्यादा सक्रिय होते हैं इसलिए बच्चों को ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियां और तरह-तरह के पौष्टिक आहार खाने के लिए देने चाहिए । क्योंकि फल और हरी सब्जिय़ों जैसे गाजर, हरी बीन्स, संतरे, स्ट्रॉबेरी में विटामिन सी होता है और ये कैरोटीन युक्त भी होते हैं। इनमे बच्चे की इम्युनिटी को बढ़ाने वाला तत्त्व होते हैं।
कई शोधों के अनुसार ये बात सामने आई है कि हरी सब्जियां और फलों में रोगों के खिलाफ हमारी रक्षा करने की ताकत होती है। इसलिए एक दिन में अपने बच्चो को कई बार में फलों और सब्जियों,दूध,दही,मीट,हरी सब्जियां,अंडे को उनकी भूख के अनुसार खिलाने का प्रयास करना चाहिए। क्योंकि ये सभी बच्चे की इम्युनिटी को संक्रमण से लड़ने के लिए मजबूत बना सकते है।

७. टीकाकरण(वैक्सीनेशन)

बच्चों को उनके जन्म के तुरंत बाद से टीकाकरण करवाना आवश्यक है ये टीके बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाते ही हैं साथ ही में कई रोगों से बच्चों की रक्षा भी करते हैं। इन टीकों में से प्रमुख टीके हैं जिन्हे हर बच्चे को लगवाया जाना जरूरी है और उनमे से कुछ प्रमुख है : बीसीजी(BCG) , टीटी ( TT ) , हेपेटाइटिस-बी ( hepetitis – B ), मीसल्स ( Measles ), ओरल पोलियो वैक्सीन (Oral Polio Vaccine ) इत्यादि।
बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के नुस्के और रेसिपीज

छोटे बच्चों  के लिए आसान एवं स्वास्थ्यवर्धक रेसिपीज़

१. सूजी/रवा की खीर

बच्चे जब छह माह के पूरे हो जाते हैं तब आप उनको ठोस आहार देना शुरू कर सकते हैं और सूजी की खीर एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है स्वादिष्ट, हल्की और स्वास्थ्यवर्धक।
तो आइए आसानी से बनने,पचने वाली इस रेसिपी को बनाने की विधि जानते हैं:
सामग्री:
  • सूजी – १ कटोरी
  • घी – २ छोटा चम्मच
  • इलायची पाउडर – १ चुटकी
  • पानी – ३ कप
  • मेवे का पाउडर – १/२ छोटा चम्मच (८ महीने से बड़े बच्चों के लिए)(ऐच्छिक)
विधि:
  • सूजी को साफ पैन लेकर सूखा भून लें।
  • एक बर्तन में ३ कप पानी रख कर उबाल आने दें ।
  • उबलते हुए पानी में भुनी हुई सूजी को धीरे-धीरे मिलाएं।
  • इसे बराबर चलाते रहें जिससे गाँठे न पड़ें।
  • सूजी के पकने जाने पर मिल जाती है इसमें घी मिला दें।
  • अब जब सूजी अच्छी तरह से पक चुकी है तब इसमें  इलायची पाउडर मिला दें।
  • इसे अधिक स्वादिष्ट एवं पौष्टिक बनाने के लिए इसमें सूखे मेवे का पाउडर मिला सकतीं हैं।
सूजी की खीर में सूजी और सूखे मेवे पाउडर के कारण बच्चे को पौष्टिक आहार सरलता से मिल जाता है। बच्चे को इस खीर से भरपूर ऊर्जा मिलती है।
इसमें फाइबर और कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होता है। इस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बिलकुल नहीं है इसलिए ये बेहद स्वास्थयवर्धक है।

२. साबूदाना दलिया

साबूदाना दलिया भी बच्चों के लिए एक स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक आहार का विकल्प हो सकता है जिसे आप शिशु को 7 महीने की आयु के बाद से दे सकते हैं।
सामग्री :
  • 2 बड़े चम्मच साबुदाना
  • 1 कप पानी
  • 1 चुटकी इलायची पाउडर
  • 1 चुटकी बादाम पाउडर
विधि:
  • साबूदाने को अच्छी तरह से धोएँ ।
  • साबूदाने को पूरी रात के लिए भिगो कर छोड़ दें।
  • अगले दिन उबलते पानी में भिगोया हुआ साबूदाना मिला दें और उसके पारदर्शी होने तक धीमी आँच पर गैस पर रहने दें।
  • अब साबुदाना दलिया तैयार है, इसे आप इलायची और बादाम पाउडर से डालकर बच्चे को खिला सकती हैं ।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय, संतुलित आहार, दिनचर्या,साफ़-सफाई की आदतें और व्यायाम इत्यादि का अनुकरण करके आप शिशु के इम्युनिटी सिस्टम की  शक्ति बढ़ा सकते है और साथ ही शिशु हमेशा निरोगी और स्वस्थ रहेगा।
स्मिता सक्सेना
Disclaimer: The views, opinions and positions (including content in any form) expressed within this post are those of the author alone. The accuracy, completeness and validity of any statements made within this article are not guaranteed. We accept no liability for any errors, omissions or representations. The responsibility for intellectual property rights of this content rests with the author and any liability with regards to infringement of intellectual property rights remains with him/her.