आप क्यों नहीं हो ऐडवाली मम्मा जैसी, ऐडवाली मम्मा ज्यादा अच्छी होती हैं!

आप क्यों नहीं हो ऐडवाली मम्मा जैसी, ऐडवाली मम्मा ज्यादा अच्छी होती हैं!

नहीं बेटा तुम अभी नही जाओगे 5 बजे के बाद जितना मर्जी खेलना “मेने कहा।

“लेकिन मम्मा मैंने ग्लूकोज पी लिया और ठंडा पाउडर भी लगा दिया और ऐड वाली मम्मा ने बोला ना कि अब सूरज कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता”, नमन ने तर्क दिया।

बेटा ऐसा नही होता, बहुत धूप है बाहर। बस तुम नही जा सकते, लू लग जायेगी।

आप बिलकुल भी अच्छी मम्मा नहीं हो। वो ऐडवाली मम्मा भी तो जाने देती हैं,” नमन जोर से अपना बैट पटक कर रूम में चला गया।

मैं उसे बाहर नहीं जाने दे रही थी। अभी 15 दिन पहले सनस्ट्रोक हुआ था। 2 बोतल ड्रिप चढ़ाई, जानें कितने जतन किये तब ठीक हुआ, आज फिर दोपहर के 3 बजे कैसे जाने दे सकती थी। नमन 10 साल का है उसे लगता हैं कि मैं उसकी माँ ,अच्छी नहीं है. ऐड वाली मम्मा ज्यादा अच्छी होती हैं। उनको सब पता होता है, वो बच्चों की दोस्त होती हैं और उनकी सारी बात मानती है और हमेशा अच्छी चीजें खाने को देती हैं,क़भी गुस्सा नहीं होती।

ऐसा नमन अकेले नहीं सोचता,बल्कि लगभग सभी बच्चे सोचने लगे हैं, कितनी अच्छी होती है ये ऐड वाली मॉम्स।

  • ये मम्मा  टिफिन में परांठा नही भेजती है, बिस्किट, केक,जूस का पैक हीं भेजती हैं।
  • ये कपड़ों पर दाग धब्बे देखकर मुस्कुराते हुए कोई बात नही बेटा कहती हैं।
  • ये ब्रेड जेम सॉस के लिए मना नही करती।
  • ये स्कूल से आते ही इंस्टंट नूडल्स खिलाती है।
  • दूध नही पीना तो ऐसे बिस्किट खिलाती है जिसमें ऑलरेडी दूध है।
  • ये चॉकलेट, चिप्स खुशी से दिलवाती है और खुश होती हैं कि पोषण मिल गया।
  • ये इतनी खूबसूरत, यंग होती हैं कि बच्चों की दीदी लगती हैं.बच्चों को गर्व भी होता है उनकी खूबसूरती पर।
  • ये है हर समय टिप टॉप रहने और बच्चों को उनकी फेवरेट चीज़ देंने वाली स्मार्टमॉम्स।

लेकिन हम रियल माएँ ऐसी नही होती.हमको तो पूरी हिटलर की नानी बना दिया है इन ऐड वाली मॉम्स ने बच्चों की नज़रों में।

  • हमे पता है कि सुबह 7 बजे से 2 बजे तक बच्चे बिस्किट केक के सहारे नही रह सकते इसलिए परांठा या सैंडविच जिसमें ढ़ेरों सब्जियां डाल दिया करती हैं और फ़्रूट बॉक्स अलग से बनाती हैं।
  • हम पैकेट जूस के बजाय हम घर में मेहनत से फ़्रेश जूस बनाती है।
  • हमें कपड़ों पर दाग धब्बों पर गुस्सा आता है क्योंकि कीचड़ के साथ कीटाणु भी लगे होंगे, कपड़ों के दाग भी आसानी से नही जाते।
  • बिस्किट में कितना दूध है ये हम सब जानती हैं, इसलिए घण्टों तक दूध लेकर इनके पीछे पड़ते हैं ताकि ये गिलास खत्म करें।
  • हम जैसी माँ नूडल्स तो स्कूल से आते ही कभी नही देती, बल्कि माथा-पच्ची करके हेल्दी रेसिपी बनाती हैं और पीछे भाग-भाग कर खिलाती हैं।
  • चॉकलेट से दांत खराब हो जाएं और चिप्स भूख भी खराब करती है। क़भी कभार तो ठीक ओर रोज तो नही देती।
  • महंगी, बेफिजूल चीजों की बजाय कोई फ्रूट खिलाना हम ज्यादा पसंद करती हैं।
  • हमें सारे घर को व्यवस्थित करने,, बच्चों का ख्याल, खाना कपड़े,होमवर्क सब में हमारे पास पर्सनल ग्रूमिंग का टाइम ही नहीं है, तो सुंदरता तो दब गई हैं कहीं।

(जैसा एक में बताया कि पर्सनल ग्रूमिंग के लिए पूरे हफ्ते में 1 घण्टा भी नही मिल पाता.)

इन विज्ञापनों ने हमारी छवि को बच्चों की नजरों में खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी.(निजी संस्था के सर्वे के अनुसार 45% बच्चे अपने माँ को बेहतर माँ नही मानते और 27% माँ  के समर्पण की कोई तारीफ नही करते। )

अंत में इतना ही कह सकते है कि ऐड वाली मॉम्स ने हमारा अस्तित्व ही हिला रखा है, हमे अब बच्चों को भी अपना प्यार साबित करना पड़ता हैं।

हमें माफ़ कर दो बच्चों पर, हम ऐड वाली मम्मा नही बन पाएंगी।

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