आपको लगता मुश्किल है बच्चों को खाना खिलाना…

आपको लगता मुश्किल है बच्चों को खाना खिलाना...

माँ के लिए सबसे बड़ा टास्क होता है अपने चार साल से बारह साल तक के बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाना।इस आयु में यह बच्चे अपनी पसंद नापसंद दृढतापूर्वक जाहिर करने लगते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस समय बच्चों को उनके मानसिक शारीरिक विकास के लिए मौसमी फलों के साथ ही मौसमी सब्जियों का सेवन भी करना चाहिए।उम्र का वह भाग है जहां परहेज की परवाह न करके खाने में घी,मक्खन, दूध,दही को भी प्रचुर मात्रा में शामिल करें।जो लोग माँसाहार का सेवन करते हैवह भी अपनी इच्छानुसार इन भोज्यपदार्थों को शामिल कर सकते हैं।यह तो बात पौष्टिक भोजन की आवश्यकता की हो गई।

चलिए अब देखते हैं कि ऐसा क्या उपाय करें जिससे बच्चा खुद ही भोजन की तरफ आकर्षित हो।
कहते है खाना खाने में जितना भी स्वादिष्ट हो लेकिन परोसने का तरीका या सर्व करने का तरीका नीरस हो या लापरवाही वाला हो तो वह किसी को भी अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सकता।हो भी क्यों नहीं आखिर सजावट सबको पसंद है।इसलिए कभी भी यह न सोचो कि खाना तो बच्चे ने ही खाना है तो क्या सजावट करनी!उनकी प्लेट में बाकायदा सभी डिशेज रखें बल्कि हर डिश के लिए अलग बरतन इस्तेमाल करें।हो सके तो सलाद हमेशा रखें चाहे बच्चा खाए या ना खाए।अगर आप छोटे बच्चों को हरी सब्जियां सलाद के रूप में खिलाना चाहती हैं तो एक स्मार्ट मॉम की तरह तरह तरह की शेप्स में कटिंग करें।परांठे में हरी सब्जियों को भरें व उनकी अलग अलग शेप्स बनाए।उन पर उसे खाने का दबाव न बनाए बल्कि खुद ही कोई कहानी या खेल करते हुए बच्चे का ध्यान उस पर दिलाएं।वह जरूर ध्यान देगा और खायेगा भी।इस उम्र में बच्चे कहानियां बडे चाव से सुनते हैं उन्हें आप कहानी बना कर समझायें कि क्यों जरूरी है पॉवर फूल होना और उसके लिए क्यों जरूरी है हेल्दी डाइट।अलग से कुछ न बना कर वह हर तरह का खाना बच्चे को एक साल का होते ही खिलाना शुरू कर दें जो घर में दूसरे सदस्य खाते हैं।

ऐसे ही आठ साल की उम्र से ज्यादा उम्र के बच्चों को कभी कभी वरीयता दे और पूछे आज खाने में क्या बनाएं जो हेल्दी भी हो और टेस्टी भी। यकीन मानिए वह आपके साथ न केवल क्या पकाना है इसमें रूचि लेंगे बल्कि जो बना है उसे चाव से खायेंगे।

इसके अलावा और भी बातें हैं जो आपको ध्यान देनी चाहिए कि,कहीं आप नाश्ते या खाने से ठीक पहले बच्चों को दूध या फ्रुट्स तो नहीं दे देती खाने के लिए जिनसे उनका पेट भर जाता हो और आप व्यर्थ चिंता करती हो क्योंकि ऐसा भी बहुतायत होता है कि माँ बच्चे की सेहत को लेकर इतनी साइको हो जाती है कि हर एक घंटे बाद उन्हें कुछ न कुछ खाने के लिए दबाव देती रहती हैं।खुद के व्यवहार को भी टटोलिये और खाने को सजा न बना कर मजा बनाइये।प्रयास हमेशा यही करें कि बचपन से ही सिर्फ घर के बने खाने की आदत बच्चे को पड़े।थोड़ी सी समझदारी और सयंम आप रखेंगी तो आप देखेगी कि बच्चे खुद अपने हाथों से खाना खायेंगे।यकीन मानिए इतना मुश्किल भी नहीं है बच्चों को खाना खिलाना।

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